Thursday 21 June 2012

कलेक्टर ने जगदीश जांदू को आगे बढ़ाया


श्रीगंगानगर-अब इसमे कोई संदेह नहीं कि कांग्रेस के बड़े नेताओं की या तो जिला कलेक्टर अंबरीष कुमार से कोई ताल मेल नहीं है या फिर जिला कलेक्टर इन नेताओं की परवाह नहीं करते। उनकी किसी से ट्यूनिंग है तो वो है नगर परिषद सभापति जगदीश जांदू। इसका सबूत है जिला कलेक्टर की प्रेस कोन्फ्रेंस। ओवर ब्रिज इस शहर के लिए बहुत बड़ा मुद्दा है। यह कहां बनेगा?कब शुरू होगा?बनेगा या नहीं?कौन इसके लिए प्रयास कर रहा है?ये सब बातें टॉक ऑफ टाउन हैं। कांग्रेस की टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ चुके राज कुमार गौड़ के लिए भी यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात है। जिस मुद्दे पर इतनी भ्रांतियां,शंका हो....वह सब निपट जाएं........ओवरब्रिज की जगह निश्चित हो जाए....मंजूरी हाथ में हो और कांग्रेस का कोई नेता इसकी घोषणा करे तो उसकी बल्ले बल्ले होना स्वाभाविक है। जो घोषणा करेगा श्रेय भी उसकी की झोली में होगा। राजनीतिक मजबूती भी उसे ही मिलेगी। बधाई उसे ही मिलेगी। प्रशासन पर पकड़ उसी की साबित होगी। सरकार तक अप्रोच उसी की दिखेगी। काम करवाने वाला नेता भी वही कहलाएगा। जब नेताओं में  छोटे छोटे विकास अपने नाम दर्ज करवाने की हौड़ मची हो ऐसे में ओवरब्रिज की मंजूरी की घोषणा करने वाले नेता का तो हीरो बनना बनता ही है। लेकिन जिला कलेक्टर ने जगदीश जांदू को छोड़ कर किसी को तवज्जो नहीं दी। जो घोषणा करके कांग्रेस के बड़े नेता को जनता में वाह वाही लूटनी चाहिए थी वह जिला कलेक्टर ने जगदीश जांदू को साथ बैठाकर कर दी। जिला कलेक्टर ने किसी कांग्रेसी  को मौका ही नहीं दिया ओवरब्रिज का श्रेय लेने का। जांदू को साथ ले ओवरब्रिज का ताज उनके सिर रख दिया। उन्होने श्री जांदू की उपस्थिति  में ओवरब्रिज की घोषणा करके उनको आगे बढ़ा दिया। राजनीति में कहने से अधिक दिखने का प्रभाव अधिक होता है। अब सीएम मंच से  नेता की तारीफ करे और फिर बी नेता के कंधे पर हाथ धर उसे साइड में लेकर चला जाए। बात कुछ भी ना करे....लेकिन बी की वो बल्ले बल्ले हो कि क्या कहने। यही जिला कलेक्टर ने जगदीश जांदू के साथ किया। एक तो उन्होने यह संदेश दिया कि मेरे तो जगदीश जांदू जी दूसरा ना कोई....दूसरा ये कि कोई सीएम के निकट हो या किसी ओर के हमारे कोई फर्क नहीं पड़ता। बाकी जनता खुद समझदार है। अर्थ अपने आप निकाल लेती है। कचरा पुस्तक की लाइन पढ़ो...कभी झिझक दिखे कभी तड़फ दिखे हर वक्त तुम्हारी आँखों में, मैं क्या जानू मुझे क्यों दिखता है संसार तुम्हारी आँखों में।