Sunday, 7 February, 2010

बाप बिलखता रोटी को

----- चुटकी----

धर्म गुरु के सामने
पकवानों के ढेर,
बाप बिलखता रोटी को
समय का देखो फेर।
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लंगर हमने लगा दिए
जीमे कई हजार
भूखो को रोटी नहीं
ये कैसा धर्माचार।

3 comments:

निर्मला कपिला said...

धर्म गुरु के सामने
पकवानों के ढेर,
बाप बिलखता रोटी को
समय का देखो फेर।
सटीक अभिव्यक्तियाँ हैं दोनो आजकल यही सब हो रहा है। धन्यवाद्

Udan Tashtari said...

सही कहा!

नारायण!! नारायण!

डॉ. मनोज मिश्र said...

भूखे को रोटी नहीं
ये कैसा धर्माचार।
नारायण!! नारायण!