Thursday, February 17, 2011
सोनिया बीबी को समझाओ
मजबूर नहीं
मजबूत
प्रधानमंत्री लाओ,
अरे! कोई तो
ये बात
सोनिया को
समझाओ।
ये तो हमारी मज़बूरी है मनमोहन जी
मनमोहन सिंह जी आप तो क्या मजबूर हैं , मजबूर तो हम हैं जो आपको ढो रहे हैं। देश की इस से बड़ी मज़बूरी क्या होगी कि वह सब कुछ जानता है इसके बावजूद कुछ नहीं कर पा रहा। एक लाइन में यह कि हमारा दुर्भाग्य तो देखो कि हमारा प्रधानमंत्री खुद अपने आप को मजबूर बता रहा है। जिस देश का प्रधानमंत्री मजबूर हो उस देश की जनता की मज़बूरी का कोई क्या अंदाजा लगा सकता है। मजबूर के शब्द हैं-अब तुम ही कहो क्या तुमसे कहें, वो सहते हैं जो सह नहीं सकते।
Wednesday, February 16, 2011
पी एम मजबूर है
पी एम
मजबूर है,
उनका यही
सबसे बड़ा
कसूर है।
दे दो इस्तीफा
छोड़ दो पद
सोनिया का घर
कौनसा दूर है ।
Sunday, February 13, 2011
वो प्यार है......
घोला जाए
फूलों का शबाब
उसमे फिर
मिलाई जाए
थोड़ी सी शराब
होगा वो
नशा जो तैयार
वो प्यार है........
मंदिर हुआ व्यापार
मंदिर हमने
बना दिए
श्रद्धालुओं की
लगी कतार ,
खाली झोली
लौट गए सब
मंदिर हुए व्यापार।
Saturday, February 12, 2011
पतझड़ का कब होगा अंत
सुना है हर
पतझड़ के बाद
आता है बसंत,
पता नहीं
मेरे जीवन के
पतझड़ का
कब होगा अंत।
ये दोस्ती टूटे ना
I Am Fine Here Please keep in touch with me.... Ha Ha Ha Ha ... Have a Nice Day....
Thursday, February 10, 2011
सत्य मेव जयते! सॉरी रोंग नंबर
Tuesday, February 8, 2011
हे! अफसर आपको सलाम
बसंत नेताओं के खाते में
प्रत्येक ऋतु के
सभी बसंत
नेताओं के खाते में ,
आदमी
मारा गया
लोकतंत्र के
इस घाटे में
Sunday, February 6, 2011
पेट्रोल पम्प लूटने वाला पकड़ा
Thursday, February 3, 2011
मुग्धा सिन्हा का बनवास,रावण की लंका
दुर्गा मंदिर के निकट एक चौक। चार कौने पर चार पुलिस वाले। पुलिस जिप्सी। ट्रैफिक प्रभारी अमरजीत चावला को लेकर आती एक और जिप्सी। जिसे रिछपाल सिंह चला रहे थे। समय होगा सुबह नो बजे के आस पास का। वह समय जब सर्दियों में दिनचर्या शुरू होती है। पुलिस का इतना ताम झाम दूर से दिखा तो अन्दर कुछ खटका हुआ। अपने आप से पूछा,क्या हुआ? निकट जाकर देखा तो कोतवाली का एक एस आई गजेंदर सिंह जिप्सी के बोनट पर कोहनी टिकाये चालान काट रहा था। मतलब पुलिस मोहल्ले में लोगों को हेलमेट पहनाने के लिए जी जान लगाए हुए थी। जिस चौक पर पुलिस इतनी सुबह मुस्तैद थी वही पास ही में कुछ समय पहले बड़ी चोरी हुई थी। जिसके यहाँ चोरी हुई वह कोतवाली के कई चक्कर निकाल चुका। आज तक कुछ नहीं हुआ। पुलिस के पास जब्त कम है वरना हर घर के आगे एक सिपाही खड़ा होगा हाथ में चालान बुक लिए। बिना हेलमेट निकले और चालान हाथ में। वहां से आते समय एक घर के सामने मुखिया अपने बेटे को कह रहा था-हेलमेट लेकर निकलना। हर चौराहे पर पुलिस है। अन्दर से बेटे की आवाज आई--ए वी सवेरे सवेरेशुरू कर देंदे है। अभी तो कुछ भी नहीं। जान प्रतिनिधियों का आशीर्वाद ऐसे ही इन पर रहा तो कुछ और दृश्य देखने को मिलेंगे। पुलिस बीडी,सिगरेट बेचने वालों के यहाँ खड़ी होगी। डब्बी पर लिखा है,सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानि कारक है। पुलिस का यह फर्ज है कि वह आपके स्वास्थ्य की रक्षा करे। इसलिए जैसे ही आप सिगरेट पीने लगोगे आप पर आत्महत्या की कोशिश का मुकदमा हो जायेगा। इसी प्रकार के सीन शराब की दुकानों के सामने होंगे। शराब की बोतलों पर तो जहर लिखा होता है। जब पुलिस को आम आदमी के सर की इतनी फ़िक्र है कि वह सारा काम छोड़ कर सर पर हेलमेट रखवाने के काम में लगी है। तो वह किसी को जहर थोड़ी ना पीने देगी। आखिर पुलिस है। उसकी जिम्मेदारी है आपकी रक्षा करना। जान है तो जहाँ है। लगे रहो पुलिस जी।
Tuesday, February 1, 2011
हेलमेट! अपरोधों की रोकथाम के लिए
Friday, January 28, 2011
हिन्दुमलकोट बोर्डर खोलने का आग्रह

Thursday, January 27, 2011
अधिकारियों का समूह चित्र
श्रीगंगानगर--चार दशक पहले प्राइमरी स्कूल में पांचवी की अंतिम परीक्षा से पहले चौथी कक्षा के विद्यार्थियों ने पांचवी को विदाई पार्टी दी। उस दिन पांचवी के विद्यार्थियों ने मास्टरों के साथ समूह चित्र खिंचवाया। क्योंकि पांचवी के बाद सब यहाँ से चले जाने थे। कौन कहाँ जायेगा,फिर मिलेगा या नहीं? इसलिए चित्र के लिए सभी में उत्साह था। ताकि याद बनी रहे। ऐसा ही दृश्य गणतंत्र दिवस पर कलेक्टर की कोठी पर उस समय साकार हो गया जब सभी प्रशासनिक अधिकारियों ने कलेक्टर के साथ ग्रुप फोटो खिंचवाया। इसके लिए अधिकारियों को बुलाया गया। ज्याणी जी को आवाज लगाकर एक अधिकारी बोला, ज्याणी जी के बिना सब अधुरा है। इनमे फोटो के लिए ठीक वैसा ही जोश देखने को मिला जो पांचवी के बच्चों में था। ये तो फोटो खिंचवाने वाले जाने या सरकार कि कौन कौन विदा होने वाला है!
इस बार कलेक्टर के यहाँ कांग्रेस का कोई नेता,कार्यकर्त्ता नहीं पहुंचा। उनमे से भी कोई नहीं जो शादी के जश्न में इन्ही अधिकारियों की मेजबान के रूप में आव भगत में लगे थे। कांग्रेस का कोई धड़ा नहीं था। यूँ लगा जैसे समारोह का अघोषित बहिष्कार कर रखा हो। पूर्व,वर्तमान जिला प्रमुख को गिनती में शामिल ना करें तो बीजेपी का भी कोई बंदा नहीं था। यह अचरज की बात थी। निर्दलीय सभापति के साथ एक दो पार्षद आ गये थे बस। हर बार कलेक्टर,मंत्री या अन्य वीआईपी सोफे पर बैठते हैं। उनसे निकटता जताने के लिए जानकर लोग सोफे के आस पास वाली कुर्सियों पर कलेक्टर के आने से पूर्व ही बैठ जाते हैं। इस बार भी यही हुआ। किन्तु इस बार कलेक्टर उनसे अधिक चतुर है। वे सोफे पर बैठने की बजाये खड़े ही रहे। लोग अपने साथ लाये फोटोग्राफरों से कलेक्टर के निकट खड़े होकर फोटो उतरवाते रहे। एस पी साहब आये नहीं अभी इसलिए उनका ज़िक्र तब जब वे आ जायेंगें। फ़िलहाल तो डिप्टी राजेन्द्र सिंह कलेक्टर के लाडले बने हुए हैं। यूँ दीक्षा कामरा भी हैं। लो एस पी भी पहुँच गए। बदन पर पठानी सूट, पैरों में तिल्ले वाली पीली जूती। कोई कह ही नहीं सकता था कि ये इनोसेंट दिखने वाला सिख नौजवान श्रीगंगानगर जैसे जिले का एस पी है। उनके आने तक आधे से अधिक लोग जा चुके थे। कलेक्टर ने उनके साथ जलपान लिया। एक बात और अधिक हैरान कर देने वाली थी। वह यह कि इस बार कांडा बंधू नहीं आये। अशोक गहलोत के झटके का असर है या कोई जरुरी काम आन पड़ा,कौन जाने! मनिन्द्र कौर नंदा यह बताना नहीं भूलती थी कि वे एक माह कि विदेश यात्रा करके आई हैं। श्री कृष्ण लीला एंड कंपनी को पहली बार देखा गया। वे दो अम्बुलेंस कलेक्टर की मार्फ़त जनता का समर्पित करवाने आये थे। कलेक्टर के झंडी दिखाते ही वे वहां से चले गए। कलेक्टर के साथ एक झंडी डीवाईएसपी राजेन्द्र सिंह के हाथ में भी थी। अचानक सभापति भी आ गए। राजेन्द्र सिंह ने अपनी झंडी उनको पकड़ा डी। इसके साथ ही फोटो में कई चेहरे बढ़ गए। गणतंत्र और स्वतन्त्र दिवस के मुख्य समारोह के बाद कलेक्टर निवास पर जलपान समारोह होता है। झंडा फहराने के लिए कोई मंत्री आया हो तो यहाँ आने वालों की संख्या अधिक होती है। समारोह में कौन आ सकता है,कौन नहीं? किसको किस कारण से निमंत्रण दिया जाता है। इस बारे में कुछ खास नहीं मालूम। ये पता जरुर है कि हर बार पुरानी लकीर ही पीटी जाती है। नासिर काज़मी कहते हैं-फिर सावन रुत की पवन चली तुम याद आये,फिर पत्तों की पाजेब बजी तुम याद आए। एसएमएस--एक मेंढक ज्योतिषी के पास गया। ज्योतिषी बोला-बच्चा!आज तेरी किस्मत में एक लड़की है। वो तेरे बारे में सबकुछ जानना चाहती है। मेंढक ने खुश होकर पूछा-मगर महाराज वो मिलेगी कहाँ? ज्योतिषी ने गंभीरता से कहा,बायो लैब में।
Tuesday, January 25, 2011
सम्मान! कोई कारण भी तो हो
Monday, January 24, 2011
राजनीति की अपनी जुबां है
श्रीगंगानगर-राजनीति है ही ऐसी,कई बार वाणी के स्थान पर मौन, बोडी लैंग्वेज , चेहरे पर आते जाते भाव बहुत कुछ कह जाते हैं। जैसे गत दिवस मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किया। छब्बे जी बन जाने के उम्मीद पाले एक इन्सान को एक बार तो दूबे जी बना दिया। उन्होंने पंचकोसी से लौटते समय ज्योति कांडा के यहाँ चाय पीने का अनुरोध स्वीकार कर लिया, केवल चाय और कुछ भी नहीं। वापसी के समय उन्होंने इस बारे में पता भी करवाया क़ी चाय का ही इंतजाम है या और कुछ भी। श्री गहलोत और उनके पर्सनल स्टाफ को आयोजकों ने बार बार यही विश्वास दिलाया गया कि केवल चाय ही है। श्री गहलोत ने गाड़ी रुकवाई और कारखाने में चले गए। वहां तो मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए कलियाँ ,फूल बिछे थे। इस से पहले क़ी उनके मंत्री उनके पीछे अन्दर पहुँचते वे तो वापिस आ गए। ये क्या , फटाफट गाड़ी में बैठे और झटपट ये जा वो जा। गाड़ी में उनके साथ बैठे एक मंत्री ने श्री गहलोत को बताया कि फलां मंत्री जी रह गए, जो उनके साथ थे। मगर गहलोत जी फलां मंत्री के लिए भी गाड़ी नहीं रोकी। गाड़ी में मुख्यमंत्री ने अपने सुरक्षा ऑफिसर से इस बात पर नाराजगी दिखाई कि उसने ठीक से पता नहीं किया कि आयोजकों ने केवल चाय ही रखी है या बहुत कुछ। गहलोत जी को निकट से जानने वाले इस बात को जानते है कि कड़क चाय क़ी तलब उनको रहती है। इसी कारण वे सफ़र में अपने साथ थर्मस रखते हैं। किन्तु इसके साथ साथ वे इस बात का भी पूरा ध्यान रखते हैं कि वे कहाँ हैं और किस माहौल में हैं। किसी के अंतिम संस्कार से लौटते समय आम आदमी भी रास्ते में स्वागत सत्कार से परे रहता है ये तो मुख्यमंत्री हैं। जिनके हर कदम पर जन जन की नजर लगी रहती है। इसलिए भड़क गए स्वागत का तगड़ा ताम झाम देखकर। इसमें कोई शक नहीं कि श्री गहलोत कांडा परिवार को जानते हैं। हाँ ये संभव है कि कांडा परिवार के उत्साही सदस्य श्री गहलोत के स्वभाव को ठीक से ना जानते हों। वरना कोई जानबूझकर मेहमान के मूड के प्रतिकूल आचरण करके इस प्रकार अपनी उपेक्षा क्यों करवाता। सुना है कि ज्योति कांडा यू आई टी की चेयरमैनी के दावेदार हैं। वैसे पंचकोसी जाते समय उन्होंने अपना थर्मस साधुवाली में प्रशासन को सौंप दिया था चाय के लिए।मुख्यमंत्री की इस यात्रा की थोड़ी और चर्चा कर लेते हैं। मुख्यमंत्री किसकी गाड़ी में बैठते है,किसको अपने साथ रखते हैं। राजनीति में यह सब बहुत महत्व रखता है। शोक की इस यात्रा का कोई दूसरा अर्थ ना निकले,उन्होंने जयपुर से अपनी गाड़ी यहाँ मंगवा ली थी। लालगढ़ हवाई पट्टी पर मुख्यमंत्री श्री गहलोत लोगों से मिल रहे थे। किसी नेता ने गुरमीत सिंह कुनर को राय दी कि वे मुख्यमंत्री की गाड़ी के निकट खड़े हो जाएं ताकि रवानगी के समय मुख्यमंत्री उनको निकट खड़ा देख अपने साथ बिठा लें। ऐसा करना कुनर के स्वभाव में नहीं था। काफिला यहाँ से रवाना हो गया। कुनर अलग गाड़ी में। साधुवाली में श्री गहलोत का तीसरा नेत्र खुला। उन्होंने खुद कुनर को बुलाया और अपने साथ बिठा कर पंचकोसी की ओर चल पड़े। जयपुर से जल संसाधन मंत्री परसराम मदेरणा भी श्री गहलोत के साथ आये थे। उनके रिश्तेदार विधायक संतोष सहारण ने उनसे गाड़ी में बैठने के लिए निवेदन किया। श्री मदेरणा ने इंकार कर दिया। वे रामलाल जाट के साथ हो लिए। अब इसका कोई कोई भी मतलब निकाले कोई क्या कर सकता है।
कृपा शंकर शर्मा "अचूक" का शेर है-ये कोई खेल नहीं जिंदगी के जीने का,लगी है शर्त तो! सिक्का उछल कर देखो। एस एम एस राजू ग्रोवर का--सूरज मेरे अपनों को पैगाम देना,ख़ुशी का दिन हंसी की शाम देना। जब वो पढ़े प्यार से ये सब ,उनके चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान देना।