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Sunday, April 3, 2011
अब सतयुग आया समझो
श्रीगंगानगर-अब ठीक है। बेक़रार दिल को सुकून मिल गया। मन प्रसन्न है। आत्मा ख़ुशी के तराने गा रही है। हिन्दूस्तान क्रिकेट का बादशाह बन गया। सब चिंताएं समाप्त। कोई परेशानी नहीं। देश में क्रांति होगी। कप आ गया अब जो आपके सपने हैं सब पूरे हुए समझो। घोटाले नहीं होंगे। जो हो चुके उनके पैसे सरकारी खजाने में आ जायेंगे। नेता ईमानदार हो जायेंगे। करप्शन इतिहास बन जायेगा। देश में कानून का राज होगा। कानून भी सब के लिए बराबर। जाति,धर्म,अमीर,गरीब देख कर कोई भेद भाव नहीं। मंत्री भी सरकारी कर्मचारी,अफसर की तरह दफ्तरों में बैठेंगे। वे भी तो वेतन लेते हैं। जनता के काम कर्मचारी,अधिकारी,मंत्री अपना काम समझ कर तुरंत करेंगे। अब फैसले नहीं न्याय होगा। पीड़ित को न्याय के लिए इंतजार नहीं करना होगा। वह खुद उसकी चौखट पर आएगा। पुलिस दादागिरी छोड़कर प्रताड़ित का साथ देगी। खुद किसी को तंग परेशान नहीं करेगी। अपराधियों से अपनी मित्रता तोड़ देगी। सज्जन लोगों का साथ करेगी। थानों में सुनवाई होगी। ऊपर की कमाई नहीं होगी। फरियादी को भटकना नहीं पड़ेगा। नेता जनता के प्रति जवाबदेह होंगे। चुनाव में भले आदमी खड़े होंगे। कई भले लोगों में से सबसे भले को चुनना होगा। नगर पालिका से लेकर संसद तक में जनता के लिए काम होगा। हल्ला-गुल्ला,लड़ाई झगडा,मार-पीट, गाली-गलौच बिलकुल बंद। संवेदनशील अफसर फिल्ड में लगेंगे। काम के लिए सिफारिश की जरुरत ख़तम। सरकारी अस्पतालों में इलाज होगा। सभी उपकरण एकदम ठीक काम करके सही रिपोर्ट देंगे। दवाई सस्ती होगी। जेलों में सालों से बंद पड़े बंदियों की सुनवाई होगी। रसोई का सामान सस्ता होगा । भिखारी नहीं रहेंगी। सबको योग्यता के हिसाब से काम मिलेगा। कोई भूखा नहीं सोयेगा। सब के तन पर कपडे होंगे। बेघर के घर अपने होंगे। काला धन सब देश में आ जायेगा। वह देश,जनता की उन्नति के लिए खर्च होगा। हमारा प्रधानमंत्री मजबूर नहीं होगा। अफजल,कसाब को फंसी होगी। जम्मू-कश्मीर सच में हमारा होगा। जैसे बाकी राज्य। टैलेंट की कद्र होगी। आरक्षण नहीं रहेगा। न्यूज चैनलों पर खबर दिखाई जाएगी। कलयुग सतयुग में बदल जायेगा। दूध दही की नदियाँ बहने लगेगी।देश की सभी समस्याओं का अंत तुरंत हो जायेगा। अमेरिका की हुकूमत हिन्दूस्तान पर नहीं चलेगी। दुनिया हमारे इशारे पर चलेगी। क्योंकि हम विश्व विजेता हैं क्रिकेट के। क्या बकवास करते हो? ऐसा कुछ नहीं होने वाला! क्यों? किसने कहा? ना जाने किस किस बात से दुखी, हैरान,परेशान करोड़ों लोग रात भर से ख़ुशी में सराबोर होकर बेवजह थोड़ी नाच रहे हैं। माता पिता के जन्म दिन पर उनको बधाई दी हो या नहीं मगर अब जाने अनजाने सबको मुबारक बाद दे रहे हैं। जब सब खुश हैं। सभी में उमंग है। बधाई दे ले रहे हैं। मिठाइयाँ बाँट रही है। पटाखे चल रहे हैं। सभी छोटे बड़ों के चेहरों पर मुस्कान है। और तुम कह रहो हो कि वर्ल्ड कप जीतने के बावजूद जनता की किसी भी परेशानी, दुःख,तकलीफ पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। वे सब की सब हमारी नियति है। हमारी तक़दीर है। इनको तो भोगना ही है। हम तो वर्ल्ड कप के बहाने कुछ क्षण के लिए इनको भूलना चाहते हैं इसलिए ख़ुशी दिखाकर अन्दर के दर्द छिपा रहे हैं। सच्चाई सबको पता है। दिनेश सिंदल कहते हैं--फटी जेब से गिर गया दिन,पल पल ना अंगुली पर गिन,ऐसी आपाधापी में ,दिन बीतेंगे कितने दिन।
Friday, April 1, 2011
Thursday, March 31, 2011
खेल खेल में अनेकता में एकता
श्रीगंगानगर-कमाल है,खेल खेल में भारत एकता के सूत्र में बंध गया। क्रिकेट ने वह कर दिखाया जो राजनेताओं की अपील,धर्मगुरुओं के उपदेश, टीचर्स की क्लास नहीं कर सकी। देश के कण कण से एक ही स्वर सुनाई दे रहा था, हम जीत गए। भारत विजयी हुआ। जाति,धर्म,समाज,पंथ सब गौण हो गए। रह गया तो भारत और उसकी पाक पर विजय का उल्लास। दिन के समय किसी काले पीले तूफान के कारण गहराती शाम का दृश्य तो याद है। लेकिन आधी रात को दिन जैसा मंजर पहली बार देखा। १९८३ में भी हमारी टीम रात को ही वर्ल्ड कप जीती थी। ऐसा कोलाहल तो तब भी नहीं दिखाई,सुनाई दिया। तीन दशक में क्रिकेट बादशाह होकर हम पर राज करने लगा। क्रिकेट खेलों का राजा हो गया। इसके आगे कोई नहीं ठहरता। क्रिकेट जन जन के दिलों में धड़कता है। वह उम्मीद है। जीवन है। जुनून है। कारोबार है। ग्लेमर है। उसकी जीत भारत के अलग अलग कारणों से परेशान जनता को खुश कर देती है चाहे कुछ देर के लिए ही सही। इससे अधिक और कोई खेल किसी को दे भी क्या सकता है। जो क्रिकेट दे रहा है, वह तो तमाम खेल मिल कर भी नहीं दे सकते। इसे क्रिकेट की महानता कहो या जनता का पागलपन,दीवानगी। क्रिकेट ऐसा ही रहेगा। अन्दर तक जोश भर देने वाला। सभी आवश्यक कामों को मैच के बाद तक टाल देने वाला। क्रिकेट मैच की जीत जनता के अन्दर नवजीवन का संचार करती है। हार मायूसी। खिलाडी हार के बाद उतने मायूस नहीं होते जितने लोग। क्रिकेट मैच ने कई घंटे तक सबको एक जगह रुकने के लिए मजबूर कर दिया।सरकार ने मैच देखने के आदेश नहीं दिए थे। कोई टोटका भी नहीं था कि मैच देखने से जीवन में खुशहाली आएगी। इसको देखने से कोई ईनाम भी नहीं मिलना था। इसके बावजूद सब व्यस्त थे। मैच के अंतिम क्षणों में जब भारत की जीत साफ दिखाई दी तो हल्ला गुल्ला शुरू हो गया। जैसे ही पाकिस्तान हारा भारत की जीत का उल्लास घरों के कमरों से लेकर सड़कों पर उतर आया। टीं,पीं,पों ,हुर्रे,हूउ...... के मस्ती भरे कोलाहल ने कई घंटे से पसरे सन्नाटे की गिल्लियां उड़ा दी। जो सड़क,गली सुनसान थी वहां पटाखों के शोर ने विजय के तराने गाए। गलियों में भारत माता की जय का उदघोष करती टोलियाँ घरों की चारदीवारी,बालकोनी में खड़े बच्चों को जोश दिला रही थी। फिर ना तो माता पिता की डांट की परवाह ना सुबह होने वाली परीक्षा की चिंता। सबके स्वर एक हो गए। विजय का उदघोष और तेज होकर वातावरण को आह्लादित करने लगा। कई घंटों से ठहरा हुआ भाव रूपी जल लहरें बन ख़ुशी से नृत्य करने लगा। क्रिकेट की अ,आ,इ ..... नहीं जानने वाला पूरे माहौल को अचरज से देख रहा था। उसके चेहरे पर ख़ुशी थी। ख़ुशी इस बात की कि वह जानता है कि यह भारत में ही संभव है जहाँ खेल खेल में अनेकता को एकता में बदला जा सकता है। क्रिकेट तो एक बहाना है। असल में यह हमारे संस्कार है। हमारी संस्कृति है। जिस पर युगों युगों से हमें गर्व है और हमेशा रहेगा।
Sunday, March 27, 2011
खेल खेल है जंग केवल जंग
श्रीगंगानगर--राजस्थान के पूर्व मंत्री गुरजंट सिंह बराड़ और वर्तमान मंत्री गुरमीत सिंह कुनर बेशक बहुत अधिक नहीं पढ़े मगर वे बहुत अधिक कढ़े हुए जरुर है। उन्हें अनुभव है, जीवन का। समाज का। सम्बन्धों का। राजनीति का। अमीर होने का मतलब भी वे अच्छी तरह जानते हैं तो गरीब के दर्द की जानकारी,अहसास भी उनको है। तभी तो लाखों रूपये इन्वेस्ट करके शुरू किये गए स्पैंगल पब्लिक स्कूल के उद्घाटन अवसर पर इन्होने वह दर्द बयान किया। गुरजंट सिंह बराड़ ने कहा कि स्कूल में कम से कम पांच प्रतिशत बच्चे कमजोर वर्ग से होने चाहिए। ऐसे बच्चों की शिक्षा का इंतजाम स्कूल करे। उन्होंने शिक्षा को व्यापार ना बनाये जाने की बात कही। मंत्री गुरमीत सिंह कुनर ने स्कूल में कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों की संख्या पच्चीस प्रतिशत होनी ही चाहिए। ताकि गरीब बच्चों को उच्च वर्ग के बच्चों के साथ पढने का अवसर मिल सके। श्री कुनर ने तो यहाँ तक कह दिया कि भविष्य में उनको यहाँ आने का मौका मिला तो वे देखेंगे कि ऐसा हुआ या नहीं। मंच संचालक शिव कटारिया ने प्रबंध समिति की और से श्री कुनर को भरोसा दिलाया कि उनकी बात का पालन होगा। सभी को यह देखना है कि भविष्य में क्या होगा। इस स्कूल में और उस खेल के मैदान में। उस मैदान में जहाँ खेल को दो देशों की जंग में बदलने का खेल हो रहा है। जी हाँ बात भारत-पाक में ,ओह!सॉरी, भारत-पाक की क्रिकेट टीमों की जो दो दिन बाद सेमीफ़ाइनल खेलेंगी। वैसे तो यह सेमी फ़ाइनल है लेकिन भारतियों और पाकिस्तानियों के लिए तो यही फ़ाइनल है। यह समझ से परे है कि देश प्रेम,राष्ट्र भक्ति इन टीमों के मैच के समय ही क्यों उबाल खाती है। खेल आज चाहे बहुत बड़ा कारोबार बन गया हो, शिक्षा की तरह किन्तु असल में तो यह सदभाव,भाईचारा,प्रेम,प्यार ,आपसी समझ के साथ रिश्तों में गर्माहट बनाये रखने का पुराना तरीका है। मनोरंजन तो है ही। जंग एकदम इसके विपरीत है। जंग में सदभाव,भाईचारा,प्रेम प्यार सबकुछ ख़तम हो जाता है। वहां मनोरंजन नहीं मौत से आँखे चार होती है। खेल में रोमांच होता है। लेकिन इन दोनों टीमों का मैच तनाव लेकर आता है। खिलाडियों से लेकर दर्शकों तक। स्टेडियम में खिलाडी सैनिक दिखते हैं। किसी को चाहे भारत की धरती से रत्ती भर भी प्यार,अपनापन ना हो,वह भी पाक टीम से अपनी टीम की हार को सहन नहीं करता। बंगलादेश, कीनिया,कनाडा किसी भी पिद्दी से पिद्दी टीम से पिट जाओ बर्दाश्त कर लेंगे। पाक से हार हजम नहीं होती। वह बल्लेबाज हमको अपनों से अधिक प्यारा है जो पाक गेंदबाज को पीटता है। गेंदबाज वह पसंद जो पाक खिलाडी को आउट करे। पाक टीम के सामने कमजोर कड़ी साबित होने वाला कोई भी खिलाडी हमारी नजरों को नहीं भाता चाहे वह क्रिकेट का भगवान सचिन ही क्यों ना हो। निसंदेह जिन देशों में क्रिकेट खेली जाती है वहां क्रिकेट प्रेमियों में भारत -पाक टीमों में होने वाले मैच के प्रति उत्सुकता रहती है। अरबों का व्यापार होता है। इसके बावजूद यह खेल है। इसको जंग में नहीं बदलना चाहिए। जंग नफरत पैदा करती है। खेल नफरत को मिटा कर प्यार जगाता है। कम शब्दों में खेल खेल है और जंग केवल जंग। खेल खेल में जंग का होना किसी के लिए किसी भी हालत में ठीक नहीं। किसी कवि ने कहा है--सारी उम्र गुजारी यों ही, रिश्तों की तुरपाई में ,दिल का रिश्ता सच्चा रिश्ता ,बाकी सब बेमानी लिख।
Saturday, February 19, 2011
सॉरी , और कुछ भी नहीं
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कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप..क्रिकेट वर्ल्ड कप............. । फिलहाल और देश में और कुछ भी नहीं है।
Sunday, January 24, 2010
पाकिस्तानी माल नहीं बिका
----चुटकी----
क्रिकेट की मंडी में
नहीं बिका
पाकिस्तानी माल,
ये कूटनीति है
या कुदरत का
कोई कमाल।
क्रिकेट की मंडी में
नहीं बिका
पाकिस्तानी माल,
ये कूटनीति है
या कुदरत का
कोई कमाल।
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