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Wednesday, December 2, 2009

फ़िर पुरानी बात,पुराने घाव

भोपाल गैस कांड की त्रासदी को २५ साल हो गए। इतने समय में एक पीढ़ी जवान हो गई।किंतु मुद्दे की गर्मी वैसी वैसी की वैसी ही है।पता नहीं कब इस त्रासदी को हिंदुस्तान भुला पायेगा।हर साल वह भयावह रात याद आ जाती है जब लोग नींद में ही इस दुनिया को छोड़ गए।मीडिया भी इस प्रकार के मामले सालगिरह के रूप में उठाता है। कभी दसवीं तो कभी पच्चीसवीं। मीडिया इस प्रकार के मुद्दे हर रोज़ प्रकाशित करे। लोगों को प्रेरित करे, अपने हक़ के लिए लगातार लड़ते रहने के लिए। लेकिन ऐसा होता नहीं। साल में एक बार मीडिया को बीती घटना याद आती है। उसके बाद ३६४ दिन चुप्पी। सरकार को यूँ भी इस प्रकार की बात कम याद रहती है। अब दो-तीन दिन वही होगा जो हर साल होता है। प्रदर्शन,सेमिनार,गोष्ठी आयोजित होंगे। नेता मरने वालों के प्रति शोक जताएंगे। मतलब की आप सब एक साल पहले के इन्ही तारीखों के अख़बार देख लेना। पता नहीं हमारे देश के नेता विजन कब अपने अन्दर पैदा करेंगे।