शायद फ़िर से वो तकदीर मिल जाए
जीवन के सबसे हसीं वो पल मिल जाए
चल फ़िर से बनायें बारिस में कागज की नाव
शायद फ़िर से अपना बचपन मिल जाए।
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खामोशी में जो सुनोगे वो आवाज मेरी होगी
जिंदगी भर साथ रहे वो वफ़ा मेरी होगी
दुनिया की हर खुशी एक दिन तुम्हारी होगी
क्योंकि इन सब के पीछे दुआ हमारी होगी।
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कसमों से बंधी रस्में, रस्मों से बंधे रिश्ते,रिश्तों से बंधे अपने,अपनों से बंधे दिल,दिल से बंधी धड़कन, धड़कन से बंधी जान, जान से बंधे आप, आप से बंधे हम।
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जिक्र हुआ जब खुदा की रहमतों का
हमने ख़ुद को सबसे खुशनसीब पाया,
तमन्ना थी एक प्यारे से दोस्त की
खुदा ख़ुद दोस्त बन के आया।
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पल दो पल में ही मिलती हर खुशी
पल दो पल में ही मिलता हर गम
पर जो हर पल साथ निभाए
वो दोस्त मिलते हैं कम। जैसे आप सब...
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दोस्ती शब्द नहीं जो मिट जाए
उम्र नहीं जो ढल जाए
सफर नहीं जो ख़त्म हो जाए
ये वो अहसास है
जिसके लिए जिया जाए
तो जिंदगी कम पड़ जाए।
---ये सब भाव दोस्तों ने एस एम एस के द्वारा प्रकट किए हैं।