Sunday, April 5, 2009

धर्मराज का दरबार

धर्मराज का दरबार। महामहिम धर्मराज अपने सिंहासन पर विराजमान थे। देवी देवता,यक्ष,सहित सभी अपने अपने स्थान पर मौजूद थे। धर्मराज का चेहरा भाव हीन था। देवी-देवताओं के मुखमंडल पर चिंता की लकीरें देखी जा रही थी। इन्द्रलोक,स्वर्ग ,नरक के टीवी न्यूज़ चैनल और अखबारों के बड़े बड़े रिपोर्टर अपने अपने हथियारों के साथ अपना अपना स्थान पहले ही रोक चुके थे। टीवी वाले तो चिल्ला चिल्ला कर लाइव दिखा रहे थे। अचानक सब लोग एक ओरदौड़े। यम के दूत नारदमुनि को ला रहे थे। नारदमुनि के हाथ में हथकड़ी पैरों में बेड़ियाँ थी। जुबान पर वही एक मात्र नारायण नारायण का नाम। जैसे ही दूत नारदमुनि को लेकर धर्मराज के सामने हुए,चित्रगुप्त बोले, नारदमुनि को लाने में इतना समय कैसे लगा? ये हिंदुस्तान की संसद नहीं जहाँ समय की कीमत नहीं समझी जाती। दूत ने कांपते हुए बताया कि इन दिनों इस रोड पर ट्रैफिक बहुत अधिक था इसलिए देर हुई।
धर्मराज के संतुष्ट होने के बाद नारदमुनि को बताया गया कि उनको इस प्रकार से क्यों लाया गया था। उन पर अपनी मौत की झूठी ख़बर लिखने का आरोप है। धर्मराज ने कहा- अगर नारदमुनि ऐसा करेगा तो फ़िर विश्वास किस पर किया जाएगा। नारदमुनि को अपनी बात कहने का अवसर दिया गया। नारदमुनि बोले-- महाराज जिस लोक में मैं आजकल रहता हूँ वहां बच्चे से लेकर बूढे तक के चेहरे से मुस्कान गायब हो चुकी है। हँसी ठट्ठा भी संता बंता के नाम से किया जाता है। लोग किसी कि खुशी में खुश नही होते। लोग एक दूसरे को जिन्दा ओर खुशहाल देखकर अन्दर ही अन्दर मरते रहते हैं। इस लिए मैंने अपनी मौत की बात की। वह भी पहली अप्रैल को।
आप मेरा ब्लॉग देख लो इसी झूठ पर कई जने मुस्कुराये। महाराज मैंने किसी ओर को हंसने-हँसाने का पात्र नहीं। इसके लिए मैंने अपने आप को प्रस्तुत किया। महाराज किसी ओर पर हंसना गुनाह हो सकता है अपने आप पर नहीं।
नारदमुनि की बात पर दरबार में काना फूसी शुरू हो गई। कुछ टिप्पणियां भी धीमे धीमे आने लगी। भारत की तरह न्यूज़ वालों को यहाँ कहीं भी आने की आजादी नही थी। इसलिए वे दरबार से बाहर अपनी अपनी तरह से इस ख़बर का प्रसारण कर रहे थे।
नारदमुनि ने अपनी बात ख़तम कर धर्मराज की ओर देखा। धर्मराज ने कुछ क्षण चित्रगुप्त से बात की। उसके बाद उन्होंने फैसला कल सुनाने की बात कह कर कार्यवाही समाप्त कर दी। उनके प्रवक्ता ने आकर मीडिया को यह जानकारी दी। उसके बाद भी टीवी वाले अपने अपने अनुमान फैसले के बारे में बताते और सुनाते रहे। जो तेज थे उन्होंने एक्सपर्ट अपने स्टूडियो में बुला लिए और बहस आरम्भ कर दी। बेले दर्शकों से राय मांगी जाने लगी। सारा दिन इसी में निकल गया।

Wednesday, April 1, 2009

नारदमुनि अब नहीं रहे

यह ख़बर बड़े दुःख और शोक के साथ पढ़ी जाए कि नारदमुनि [ गोविन्द गोयल] अब इस दुनिया में नही रहे। उनको दो दिन पहले दिल का जबरदस्त दौरा पड़ा था। उसके बाद उनको आईसीयू में रखा गया । जहाँ रात को उनका निधन हो गया। उनका अन्तिम संस्कार आज दोपहर बाद पाँच किया जाएगा।
आप मुझे नहीं जानते। मैं नारदमुनि का दोस्त हूँ। उन्होंने खास तौर से मुझे ये जिम्मेदारी सौंपी थी। ताकि सभी को पता लग जाए कि नारदमुनि इस लोक की यात्रा पूरी करके चले गए।
आप कोई शोक संदेश देना चाहते हो तो ०९८४५०२२६६३ , ०९४१४२२०६६६ ,०९४१४५८०७८७,
आओ उनकी आत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

Tuesday, March 31, 2009

खुशी में हुआ बावला

एक आदमी मुख मंडल पर मुस्कान लिए डाक घर पहुँच गया। एक अफसर को कहने लगा , सर मेरी पत्नी गुम हो गई रिपोर्ट लिख लो। अफसर बोला, ये तो डाक घर है, आप पुलिस थाने जाओ, यहाँ क्यों आए हो। वह आदमी कहने लगा, मैं तो खुशी में बावला हो गया, जाना कहाँ था पहुँच कहाँ गया।

Monday, March 30, 2009

कुत्ता मरा तो खूब आए

अब आपसे विदा लेने का समय नजदीक आ रहा है। बस दो दिन की बात है। दो दिन हँसते हँसते निकल जायें तो बेहतर होगा। चलो थोड़ा हंस लेते हैं मेरे ओठों से तो हँसी गायब हो चुकी है, जब जाने का समय आ जाए तो बड़े बड़े हंसोकडे हँसाना हंसना भूल जाते हैं।
एक बहुत बड़ा अफसर था। उसके पास जानदार शानदार कुत्ता था। अफसर का कुत्ता था तो उसकी चर्चा भी इलाके में थी। सब उसको नाम और सूरत से जानते भी थे। लो भाई एक दिन कुत्ता चल बसा। ओह! अफसर के यहाँ शोक प्रकट करने वालों की भीड़ लग गई। नामी गिरामी से लेकर आम आदमी तक आया। [आम आदमी तो तमाशा देखने आया.उसको अफसर के पास कौन जाने देता।] हर कोई कुत्ते की प्रशंसा करे। मीडिया भी पीछे नहीं रहा। ब्लैक बॉक्स में कुत्ते की फोटो लगा कर उसकी याद में कई लेख लिखे गए। अफसर के खास लोगों ने कुत्ते के बारे में संस्मरण प्रकाशित करवाए। शोक संदेश छपवाए। तीये की बैठक तक मीडिया से लेकर घर घर कुत्ते की ही चर्चा थी।
अफसर कुत्ते की मौत का गम सह नही सका। उसकी भी मौत हो गई। अब नजारा अलग था। कोई माई का लाल शोक प्रकट करने नही पहुँचा। जरुरत भी क्या थी। जिसको सूरत दिखानी थी वही नही रहा।

Saturday, March 28, 2009

वरुण गाँधी की टीआरपी बढ़ी

वरुण गाँधी की टीआरपी! है ना आश्चर्य की बात। जी बिल्कुल है। अभी तक तो न्यूज़ चैनल की टीआरपी सुनी थी। गत कई दिनों से वरुण गाँधी मीडिया की, खासकर टीवी न्यूज़ चैनल, सुर्खियाँ बने हुए थे। न्यूज़ चैनल में वरुण को अपनी ताई और देश की सबसे ताक़तवर महिला सोनिया गाँधी से भी अधिक समय मिला होगा। इस से अधिक उपलब्धि किसी युवा नेता के लिए और क्या हो सकती है। आज तो पूरा दिन वरुण गाँधी के नाम ही रहा। इतनी पब्लिसिटी तो कोई जानदार,शानदार स्पीच देकर भी नही मिलती। यह सिलसिला अभी कई दिन तक चलेगा। बाकी नेता माथे पर हाथ रखकर अपने आप को कोस रहें होंगे कि हाय मैंने ऐसा वैसा क्यों नहीं बोला। अब देखना चुनाव में नरेंद्र मोदी की तरह वरुण गाँधी की भी डिमांड बढ़ जायेगी। हर बीजेपी उम्मीदवार अपने यहाँ वरुण गाँधी को लाना चाहेगा। एक न्यूज़ चैनल का संवाददाता ख़बर में वरुण गाँधी को बीजेपी का प्यादा बता रहा था। कई बार प्यादा भी अपनी चाल से खेल का पासा पलट देता है। जब बात लडाई की हो तो हर वह इन्सान महत्वपूर्ण होता है जो उसमे सीधे सीधे भाग ले रहा होता है। किस के हाथ कब कोई दाव लग जाए क्या कहा जा सकता है। एक दाव भी सही पड़ गया तो समझो बन गई बात। चुनाव में पहला और आखिरी मकसद चुनाव जीतना होता है।
वरुण गाँधी ने क्या कहा? उसको क्या कहना चाहिए था और क्या नहीं? इस बारे में हमने कुछ नहीं कहना। लेकिन इसमे कोई दो राय नहीं हो सकती कि वरुण गाँधी फिलहाल टीआरपी में अन्य तमाम लीडर्स से आगे हैं।

Friday, March 27, 2009

घुसपैठिये आतंकवादी हैं

श्रीगंगानगर जिले से लगती भारत-पाक सीमा गत दिवस जो दो पाक घुसपैठिये बी एस एफ ने मारे थे वे आतंकवादी थे। बल के डीआईजी सी आर चौहान ने कहा दोनों ९९.९९% आतंकवादी ही थे। एक सप्ताह में बल ने दो पाक घुसपैठियों को मारा और एक को जिन्दा पकड़ लिया। अब सीमा सुरक्षा बल के बड़े अफसर मुश्किल में फंस गए हैं। उनसे यह पूछा जा रहा है कि घुसपैठियों को मारा क्यों,जिन्दा क्यों नहीं पकड़ा। बल के सूत्र बताते हैं बजाये पीठ थपथपाने के बहुत बड़े अफसर यहाँ के अफसरों से कई बार सवाल जवाब कर चुके हैं। श्री चौहान ने कहा कि पहले उनको चेतावनी दी गई, मगर वे रुके नहीं। उनके पास किसी प्रकार का कोई हथियार ना हो, इस आशंका के चलते बल के जवानों ने फायर किए। यहाँ यह सवाल है कि आख़िर उनको गिरफ्तार करके क्या होता! जेल में पड़े पड़े रोटियां तोड़ते,उनकी सुरक्षा के इंतजाम करने पड़ते,राजनीति होती अलग से। खैर राजनीति तो अब भी होने की बात सामने आई है। क्योंकि लोकसभा चुनाव में एक समुदाय के वोट पर कब्जा जो करना है। इसलिए अगर वो किसी कारण मारे जाते हैं तो धर्मनिरपेक्ष? पार्टियों को तो दुःख होता ही है। [ पोस्ट के साथ डीआईजी श्री चौहान का विडियो है। वह विडियो भी हमारे पास है जिसमे उन्होंने घुसपैठियों के आतंकवादी होने की बात कही है। इस विडियो में कुछ अलग बात है मगर महत्वपूर्ण। ]

Thursday, March 26, 2009

पाकिस्तानियों की घुसपैठ

सीमा सुरक्षा बल ने बॉर्डर पर भारत में घुसने की फिराक में आए एक पाक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से एक मोबाइल फ़ोन,अलग अलग कंपनी के आठ सिम कार्ड,९०५ रूपये पाकिस्तानी बरामद गये। इसके पास एक डायरी भी मिली जिस पर उर्दू में फ़ोन नम्बर लिखे हुए हैं। इस युवक का नाम जुल्फिकार है। इसका कहना है कि वह रास्ता भटक कर सीमा की ओर आ गया। यह युवक दिन के समय पकड़ा गया। ज्ञात रहे कि चार दिन पहले दिन दिहाड़े भारत में घुसने की कोशिश करते दो पाकिस्तानियों को बीएसफ ने मार गिराया था। उनके पास भी कई सिम कार्ड बरामद हुए थे। इस घटनायों के बाद बॉर्डर पर हाई अलर्ट कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां घुसपैठ की इन प्रयासों को गंभीर मान रहीं हैं। क्योंकि दिन के उजाले इस प्रकार से भारत में घुसने का प्रयास दुस्साहस ही है। ये घटनाएँ तब हुई हैं जब भारत के गृह मंत्री पी चिदंबरम के सीमा क्षेत्रों का दौरा करने के समाचार आ रहें हैं।
पाकिस्तान ने गत दिवस मरे गए घुसपैठियों के शव लेने से भी इंकार कर दिया था। उसका कहना था कि मृतक पाक नागरिक नही है। उधर कुपवाड़ा जिले में सेना पाक आतंकवादियों से लड़ रही है। राजस्थान में पाक युवक दिन दिहाड़े भारत में आने की कोशिश करते हैं।

Wednesday, March 25, 2009

बुरे बनोगे, मजे करोगे

क्यों, बुरा लगा ना पढ़कर। लोग भला बनने के लिए कहतें हैं, नारदमुनि बुरे के गीत गा रहें हैं। चलो घर से शुरू करतें हैं। घर में जो बालक-बालिका बिल्कुल सीधे,आज्ञाकारी,अनुशासित रहतें हैं उनकी फ़िक्र कम होती है। इसके विपरीत लड़ाकू,खब्ती,शरारती की पूछ अधिक। इसलिए ताकि घर में शान्ति रहे। इनका मूड देखकर बात की जाती है।ऐसी वैसी बात करने से पहले घर वाले कई बार सोचतें हैं। यही फार्मूला हर जगह लागू होता है। मीडिया में उस पत्रकार को सर्वाधिक महत्व मिलता है जो किसी का भी बुरा करने में देर ना लगाता हो। सब यही कहतें हैं- अरे पहले उसको बुला लो,अरे , उस से बात हो गई ना, उसको निमंत्रण भेज दिया ना,अरे देखना उसको मत भूल जाना... आदि आदि। जबकि इसके विपरीत दूसरों के बारे में यही कहा जाता है, चलो कोई बात नहीं,फोन कर लेंगें। राजनीति में तो हम हर रोज देखतें हैं। राजस्थान की बात हो या देश की वही नेता कामयाब हैं जो बुरा बनकर अवसर का लाभ उठातें हैं। सरकारी ऑफिस,पुलिस विभाग में ऐसे ही व्यक्ति अन्दर और बहार पूजनीय होतें हैं। हर आदमी की मदद करने वालों को तो यह कहा जाता है,मुर्ख है,भोला है,दुनियादारी जानता ही नहीं।
टीवी पर आने वाले विज्ञापन देख लो। अधिकांश नकारात्मक होतें हैं। जैसे--अरे देख लग रहा है क्या... । अब लग गया। हमें मीठे पानी की जरुरत नहीं अरविन्द की मम्मी को उसकी जरुरत है। फलां गोली से जुबान बंद रहती है, हाथ नहीं। और बाप लड़के के थप्पड़ मारता है। अपराध की ख़बर पहले पेज पर होती है किसी ने अच्छा काम किया हो तो उसको अन्दर के पेज पर डाल दिया जाता है। अपराधी की फोटो के लिए पत्रकार ख़ुद पुलिस की लल्लालोरी करते है। समाज में बढ़िया कुछ करने वालों को अपनी फोटो ख़ुद देकर आनी पड़ती है,वह भी डरते डरते।
वर्तमान का सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगें लोग। जिसको यह रोग लग गया। उसका कुछ नहीं हो सकता। " कुछ तो लोग कहेंगें लोगों का काम है कहना"....याद रखने वाले मजे में रहतें हैं।

Tuesday, March 24, 2009

श्रीगंगानगर में ओले पड़े

देश की राजनीति गर्म है लेकिन भारत - पाक सीमा के निकट स्थित श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय में गर्मी के तेवर ढीले हो गए। शाम को तेज बरसात के साथ ओले पड़े। ओले तो कुछ मिनट ही बरसे। बरसात से श्रीगंगानगर की श्री एक बार तो बिगड़ गई। सड़कों ,गलियों में पानी जमा हो गया। बरसात के पानी में गन्दी नालियों का पानी होने से हालत ख़राब हो गई।
कविवर गोपाल दास नीरज ५ अप्रेल को श्रीगंगानगर आयेंगें। उनके सानिध्य में यहाँ कवि सम्मेलन होगा।

हिन्दुओं की बात करना गुनाह हुआ

चुनाव आयोग ने वरुण गान्धी को टिकट ना देने की सलाह देकर अपने आप को पता नहीं क्या साबित करना चाहता है। ना जाने कितने ऐसे "नेता" हैं जिन पर दर्जनों आपराधिक मुकदमें चल रहें हैं। उनके चाल चलन पर उंगुलियां उठतीं हैं। इसके बावजूद वे चुनाव लड़तें हैं,जीतकर विधायक,सांसद बन जाते हैं। चुनाव आयोग इनको टिकट दिलाने से क्यों नही रोकता। मीडिया में बार बार ऐसे "नेताओं" के बारे में बताया और दिखाया जाता है। चुनाव आयोग चुप्प। इसका तो सीधा सा यही मतलब है कि बस हिन्दुओं के पक्ष में बात करने वाला ही सबसे बड़ा देशद्रोही है। हिन्दुओं की वकालत करने वाला साम्प्रदायिक है। हिंदू हित की बात करने वाला विधायक या सांसद बनने के लायक नहीं। हिन्दुओं के बारे में सोचना भी गुनाह है। ऐसी क्या कमी है हिन्दुओं में? क्या जुल्म कर दिया हिन्दुओं ने? इंसान अपने भले की बात भी ना करे। यह कैसा वातावरण है? यह कोई किसी की चाल तो नहीं? मुस्लिम समाज की वकालत करने वाले नेता वन्दनीय और पूजनीय हो गए।हिंदू की बात करने वाला साम्प्रदायिक। कितनी हैरानी की बात है कि देश के कई कानून केवल हिन्दुओं पर ही लागू होतें हैं। कानून भी जाति,धर्म के अनुसार लागू किए जा रहें हैं। हिंदू-मुस्लिम भाई भाई हैं तो भेद-भाव क्यों? दोनों को सभी जगह समानता क्यों नहीं मिलती? अगर कोई इस बारे में बात करता है तो देश में बवाल क्यों मचाया जाता है। सही बात करने वाले की पीठ थपथपाई जानी चाहिए। यहाँ चुनाव आयोग सलाह देते हैं कि उसको टिकट ना दी जाए। चुनाव आयोग जी थोडी सलाह मुलायम सिंह यादव,लालू प्रसाद यादव,मायावती,राम बिलास पासवान,अमर सिंह जैसों को भी दे दो आपका क्या घट जाएगा। इस देश में तो अब नया नारा होना चाहिए--
जो हिंदू विरोधी
बात करेगा,
वही देश पर
राज करेगा।

Monday, March 23, 2009

जरा याद करो कुर्बानी


आज से ७८ साल पहले इसी दिन की शाम को अंग्रेजी हकुमत ने सरदार भगत सिंह,राजगुरु और सुखदेव को फांसी पर चढा दिया था। सब ग़लत और दो नंबर के काम अंधेरे में होते हैं। यही किया अंग्रेजों ने २३ मार्च १९३१ की शाम ७-३० बजे। जनता के आक्रोश के डर से पुलिस ने उनके मृत शरीर उनके परिजनों को नहीं सौंपे। डरी सहमी सरकार ने आधी रात को सतलुज नदी के किनारे इन शहीदों के मृत शरीरों का दाह संस्कार किया। तब वहां यह ऐलान किया गया " जनता को सूचित किया जाता है कि भगत सिंह,राजगुरु और सुखदेव के मृत शरीरों को,जिन्हें कल शाम[२३ मार्च] फांसी दे दी गई थी,जेल से सतलुज के किनारे ले जाया गया है, जहाँ सिख और हिंदू धर्मविधि के अनुसार उनका दाहसंस्कार कर दिया गया। उनके अवशेसनदी में प्रवाहित कर दिए गए।"
आज इनके शहीद दिवस पर इनको याद करके हम इनपर कोई अहसान नहीं कर रहे। यह हमारा धर्म भी है और कर्तव्य भी। क्योंकि यही वे लोग थे जिन्होंने बिना किसी निजी स्वार्थ के देश के लिए काम किया। आज अपने बच्चों को यह बताने का दिन है कि ये महान युवक कौन थे और हमारे लिए आदरणीय किस कारण हैं। हम मन,कर्म और वचन से उनको श्रद्धांजली अर्पित करते हैं।

Sunday, March 22, 2009

बॉर्डर पर पाकिस्तानी मार गिराए

श्रीगंगानगर जिले की भारत पाक सीमा पर बीएसफ ने २ पाकिस्तानी युवकों को मार गिराया। ये दोनों दिन में भारत की सीमा में घुसने का प्रयास कर रहे थे। इनके पास से अलग अलग कंपनी के पाँच मोबाइल फ़ोन के सिम कार्ड और पाकिस्तानी मुद्रा बरामद हुई है। इनकी उम्र २१ से २५ साल के बीच है। इस घटना के बाद बीएसफ ने पाक रेंजर्स के साथ फ्लैग मीटिंग की। रेंजर्स ने इन युवकों के शव लेने से इंकार कर दिया। दिन दिहाड़े इस प्रकार से पाकिस्तानी युवकों की भारत में घुसने की इस कोशिश ने खुफिया एजेंसियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कहीं मारे गए युवकों का सम्बन्ध किसी आतंकवादी संगठन से तो नहीं है।

Saturday, March 21, 2009

कांग्रेस-बीजेपी करे प्रयोग,दूर होंगें कई सारे रोग

हिंदुस्तान में जब से छोटे छोटे दलों के हाथ में सत्ता में मोल तोल करने की जुगत आई है तब से देश पीछे हो गया । सरकार चलने वाला दल इन प्राइवेट कम्पनी की भांति चलने वाले दलों के दल दल में फंस जाता है। वह देश हित की बजाय सरकार बचाने के जुगाड़ में लगा रहता है। हर दल को समर्थन के बदले में कुछ ना कुछ नही बहुत कुछ चाहिए। ऐसा १९८९ से चल रहा है। पहले यह कम था अब ज्यादा। अगर यही हाल रहा तो देश की कीमत पर समर्थन का सिलसिला चलता रहेगा। मगर थोड़ा सा परिवर्तन हो तो कुछ बेहतर हो सकता है। बस इसके लिए बीजेपी-कांग्रेस को तैयार होना होगा। करना कुछ भी नहीं। अब लोकसभा चुनाव में इन दोनों में से जो सबसे अधिक सीट ले वह सरकार बनाये और दूसरी पार्टी उसको समर्थन दे। कांग्रेस को सीट अधिक मिले तो वह सरकार बनाये और बीजेपी उसको पाँच साल तक बाहर से समर्थन दे। बीजेपी को अधिक सीट मिले तो सरकार बीजेपी की कांग्रेस के समर्थन से पाँच साल चले. इस प्रयोग से छोटे छोटे दलों को बारगेनिंग करने का मौका नहीं मिलेगा। बेशक यह अटपटा सा है, किंतु प्रयोग करके देखने में हर्ज ही क्या है। इस से रोज की किच किच तो नही हुआ करेगी। वरना तो ये प्राइवेट कम्पनियाँ समर्थन के बदले इतना कुछ मांगने लगेंगी कि जिसको चुकाना देश के लिए भी सम्भव नहीं होगा। वैज्ञानिकों ने भी कई प्रयोग किए तब कहीं जाकर कोई एक प्रयोग सफल होकर आविष्कार के रूप में सामने आया। जो प्रयोग यहाँ बताया गया है उस से किसी का कोई नुकसान तो है ही नहीं। बस अपना अपना अहम् त्यागना होगा।

Thursday, March 19, 2009

चित्त भी मेरी,पट्ट भी. सिक्का मेरे बाप का

बिहार में लालू प्रसाद यादव ने अपने कट्टर राजनीतिक 'दुश्मन" रामबिलास पासवान से एका कर लिया है। ऐसे में सारी खुदाई एक तरफ़ और जोरू का भाई एक तरफ़ हो गया। परिणाम यह हुआ कि जोरू का भाई साधू यादव नाराज हो गया। उसने कांग्रेस की ओर झाँका,कांग्रेस ने उसकी ओर। दोनों ने एक दूसरे की ओर झांक लिया , इसलिए देर सवेर इनको एकम एक हो ही जाना है। अब इस से इनमे से किसी को भी राजनीतिक रूप से नुकसान होने वाला नहीं। पासवान तो हर सरकार में एडजस्ट हो जाते है, शायद यही कारण है कि लालू ने उनको गले लगा लिया साधू यादव अलग पार्टी में हो जायेंगें। तब सरकार किसी भी पार्टी की हो हमारी ही होगी।
होना भी यही चाहिए। भगवान परिवार में कई मेंबर दे तो सब को अलग अलग पार्टी में एडजस्ट करवा देना चाहिए। सरकार अपने घर में ही रहेगी। सोनिया गाँधी-मेनका गाँधी को आदर्श के रूप में अपनाया जा सकता है। सिंधिया परिवार का उदाहरण दिया जा सकता है। चौटाला परिवार को देख आगे बढ़ सकते हो। नए लोग प्रिया दत्त-संजय दत्त से प्रेरणा ले सकते हैं। ऐसे प्रेरणादायी व्यक्तित्व पंचायत स्तर से लेकर सरकार तक होते हैं। संस्कार,विचार,जमीर,आत्मा,आस्था जैसे शब्द गरीब और कुचले हुए लोगों के लिए हैं। बड़े लोग इनको इस्तेमाल नही करते । वे तो हमेशा यही कहते हैं कि चित्त भी मेरी,पट्ट भी और सिक्का मेरे बाप का।

Wednesday, March 18, 2009

परिपक्व कौन? पाकिस्तानी या हिन्दुस्तानी

आशंकाओं के बिल्कुल उलट पाकिस्तान में सब कुछ ऐसे शांत हो गया जैसे कहीं कुछ अशांत था ही नहीं। मीडिया पाक में पता नहीं क्या क्या होने की आशंका,संभावना जाता रहा था, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। वहां के सैनिक अफसर,राजनेता,सरकार कैसी है इस बारे में कोई बात नहीं करेंगे। बात उस जनता की जिसको लोकतंत्र में रहने की आदत नही इसके बावजूद उसने परिपक्वता का परिचय दिया। इतना लंबा मार्च,हजारों हजार जनता,सब के सब अनुशासित। सरकार के खिलाफ आक्रोश परन्तु सरकारी सम्पति को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुँचाया। मीडिया में एक भी ख़बर ऐसी नहीं थी जिसमे ये बताया गया हो कि जनता ने फलां स्थान पर सम्पति को नुकसान पहुँचाया। इसको परिपक्वता नहीं तो और क्या कहेंगें।
इसके विपरीत हिंदुस्तान में अगर ऐसा होता तो सबसे पहले सरकारी सम्पति की ऐसी की तैसी होती। सबसे बड़े लोकतंत्र वाहक रेल पटरियां उखाड़ देते, सरकारी भवन,सरकारी वाहनों को आग के हवाले कर दिया होता। जो उनके रास्ते में आता तहस नहस हो जाता। हिंदुस्तान में इस प्रकार से न जाने कितनी बार हो चुका है। हमारी तो फितरत है, " हारेंगें तो मारेंगें,जीतेंगें तो लूटेंगें"। पाकिस्तानियों ने ऐसा कुछ भी नहीं किया।
लोकतंत्र की डींग मारने वाले हिन्दुस्तानी अपने पड़ौसी से कुछ तो सीख ही सकते हैं। पाकिस्तान की जनता को सलाम करने में मेरे ख्याल से कोई बुराई नहीं है। चाहे पाकिस्तान में यह सब कुछ दिनों के लिए ही हो , किंतु जब अच्छा हुआ तब तो उसकी प्रशंसा कर ही देनी चाहिए।

Tuesday, March 17, 2009

गरीब की जोरू सबकी भाभी

किसी बड़े साहब या बड़े आदमी की बीबी को कोई भाभी कहने की हिम्मत नहीं करता। उसको बहिन जी,दीदी या मैम कहकर बुलाया जाता है। किंतु साधारण व्यक्ति की ज्ञानवान,गुणवान,संस्कारी और व्यवहार कुशल पत्नी को भी सब भाभी कहने में आनंद का अनुभव करते हैं। ऐसा ही कुछ कर रहा है श्रीगंगानगर से प्रकाशित एक बहुत बड़े समूह का अखबार। राजस्थान पत्रिका नामक इस जाने माने अख़बार के सम्पादकीय पेज के ऊपर लिखा रहता है"हो सकता है मैं आपके विचारों से सहमत न होऊं फ़िर भी विचार प्रकट करने के आपके अधिकारों की रक्षा करूँगा। -वाल्तेयर"। फ़ैसला पाठकों को करना है की यहाँ के सम्पादकीय से जुड़े सम्मानित जन ऐसा करते हैं या नहीं। हम तो केवल कुछ ख़बरों की जानकारी देंगें। श्रीगंगानगर में सोमवार को नगर के कई प्रतिष्ठित कपड़ा और चांदी-सोने के कारोबारियों के यहाँ आयकर विभाग ने कार्यवाही की। विभाग के अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में पुलिस भी थी। यह ख़बर पत्रिका के अन्तिम पेज पर "आयकर सर्वे से हड़कंप" हैडिंग से प्रमुखता से प्रकाशित हुई। ख़बर में बताया गया किअपर आयकर आयुक्त ने फर्म संचालको से देर शाम तक पूछताछ की, उनको नोटिस देकर बुलाया गया था। मगर पत्रिका में किसी फर्म का नाम नही लिखा। ऐसा ही २७ फरवरी को प्रथम पेज पर प्रकाशित ख़बर में किया गया। ख़बर का हैडिंग था"निजी चिकित्सा संस्थान पर आयकर छापा"। बड़ी ख़बर थी, लेकिन किसके खिलाफ यह कार्यवाही हुई ,नाम नहीं था।
अब दो दिन पहले की बात करें। पुलिस ने नगर के सभी साईबर कैफे के यहाँ जाकर रिकॉर्ड की जाँच की। उनको रिकॉर्ड किस प्रकार रखना है उसके बारे में निर्देश दिए। यह ख़बर पत्रिका ने नाम सहित छापी। बाकायदा साईबर कैफे के नाम लिखे गए जहाँ जहाँ पुलिस गई।
फर्क इतना ही है कि साईबर वालों का कोई माई बाप नहीं है, ना ही इनके पास अरबों रुपयों का कारोबार है। इसलिए इनके नाम छाप देने से कोई तूफान नहीं आने वाला था।
ख़बर में क्या लिखा जाएगा,किसका नाम होगा,नहीं होगा। यह उनकी पालिसी हो सकती है। लेकिन निष्पक्षता नहीं। चूँकि संपादक के पास सर्वाधिकार सुरक्षित हैं इसलिए उनको कुछ कहना सूरज को दीपक दिखाना है। किंतु एक पाठक यह प्रश्न तो कर ही सकता है कि क्या निष्पक्षता इसी को कहतें हैं? अगर कोई निष्पक्ष आदमी श्रीगंगानगर के सभी समाचार पत्रों में प्रकाशित उक्त कार्यवाही से सम्बंधित समाचार पढ़े तो वह जान जाएगा की ऐसी "निष्पक्षता"तो छोटे अख़बार भी नहीं दिखाते। जिनको हर रोज आर्थिक संकट से दो चार होना पड़ता होगा।
मैं जानता हूँ किसी बड़े पर टिप्पणी करने से मुझ पर संकट आ सकता है मगर जो हो रहा है उसके बारे में लाखों पाठकों को जानकारी तो होनी ही चाहिए।

Monday, March 16, 2009

सियासत की लाचारी

---- चुटकी----

सियासत की
देखो लाचारी,
झुक गए
प्रेजिडेंट जरदारी।

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पाक में,किसने
किसके सामने
डाले हथियार,
ये अभी तो
पर्दे में है मेरे यार।

Sunday, March 15, 2009

पाक में कोहराम

---- चुटकी----

पाक में कोहराम
भारत की हुई
नींद हराम
अमेरिका बैठा
सोच रहा है,
किसको सौन्पू
अब कमान .

वर्ल्ड में सुंदर हैं जो नाम



















The most beautiful house in the worldÇSituated in Barcelona , Spain Owned by the famous footballer, Ronaldhino

The most beautiful city in the worldVancouver, Canada
TThe most beautiful girl in the worldHeld in France and her name is Fatima from Morrocco


The most beautiful eyes in the worldfrom Afghanistan ãÇÔÇÁ Çááå

The most beautiful eyes in the worldfrom Afghanistan ãÇÔÇÁ Çááå
The most beautiful bridge in the world
JAPAN






The most beautiful horse in the world
Arabian
The most beautiful plant in the world
It is shaped like a water bubble.. ÓÈÍÇä Çááå

ये सभी फोटो श्री सी एल वधवा जी ने मुझे मेल किए थे। इनमे संसार में सबसे सुंदर घर,वाटर फाल, लड़की,आँखें,घोड़ा,ब्रिज तथा सबसे सुंदर प्लांट का फोटो दिया गया है। धन्यवाद श्री वधवा जी का।


Saturday, March 14, 2009

डैड बॉडी का दान किया




डेरा सच्चा सौदा के मिशन सर्वजन हितार्थ मरणोपरांत देहदान अभियान के तहत एक और डेरा प्रेमी का शरीर मरने के बाद मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया गया। श्रीगंगानगर जिले के केसरीसिंहपुर कसबे सौदागर सिंह की पत्नी गुलाब कौर का निधन हो गया था। उनके परिवार वालों ने गुलाब कौर की डैड बॉडी एक मेडिकल कॉलेज को दान कर दी गई। उनके परिवार वालों और डेरा से जुड़े प्रेमियों ने गुलाब कौर को अन्तिम श्रद्धांजली अर्पित की। जिले में डेरा प्रेमियों द्वारा किया गया यह चौथा शरीर दान है।

Friday, March 13, 2009

लोकतंत्र हजम नहीं होता

----- चुटकी-----

हम समझ गए
पाक, तू पेट
पकड़ कर
क्यों रोता है,
असल में तेरे
लोकतंत्र
हजम नहीं होता है।

Thursday, March 12, 2009

थंक यू पुलिस

मेरे खाते में पुलिस को दिए जाने वाले थैंक्स की संख्या ना के बराबर है। इस बार का थैंक्स सब से हटकर है। पुलिस ने होली पर खास इंतजाम किए। इंतजाम करना उनकी ड्यूटी में सुमार है, मगर कुछ अच्छा हो तो पीठ थपथपानी ही चाहिए। इस बार सड़क पर हुड़दंग मचाने वालों को पुलिस ने पकड़ा,उनके चालान काटे। दारू पीकर हल्ला गुल्ला मचाने वालों पर अंकुश लगाया। होली की गरिमा के लिए यह जरुरी हो गया था। पुलिस के इस इंतजाम से परिवार के साथ जा रही लड़कियों को शर्मिंदगी से दो चार नहीं होना पड़ा। नगर भर से जो फीड बैक मिला वह यही था कि इस बार पुलिस ने बढ़िया काम किया। इसके लिए उनका शुक्रिया। उम्मीद है पुलिस इसी प्रकार आम जन को अपना समझ कर कम करेगी। वरना तो पुलिस का डर आमजन के अलावा किसी को नहीं होगा

पुलिस के इस इंतजाम ने उस आलोचना को धो डाला जो नाके बंदी के कारण हुई थी। नाका बंदी क्या थी, बस ऐसे था जैसे नगर में कोई आतंकवादी घुस आयें हों। तब नगर के आम जन को भरी परेशानी और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था।

ज़िन्दगी के रूप में सजा पाई है

हे खुदा कैसी तेरी खुदाई है
बेकसूर हूँ फ़िर भी सजा पाई है,
बेवफाई का इल्जाम नहीं कोई
चारों ओर फ़िर क्यों रुसवाई है।
जो चाहा वो मिला नहीं
भला करूँ तो कोई सिला नहीं
ये ज़िन्दगी है या
ज़िन्दगी के रूप में सजा पाई है।

Wednesday, March 11, 2009

तन मन हो जाए रंगीन


आप सभी को होली की रंगीन से रंगीन बधाई। आप के घर परिवार,आस-पास,आपके खास सभी के यहाँ हर पल ज़िन्दगी का हर रंग बरसे। आपके मुख मंडल पर मुस्कान रहे, आपका तन निरोगी रहे। आपको वो तमाम सुख सुविधाएँ मिले जिनकी आपने कभी कामना की हो।
--- आपका एक शुभचिंतक
गोविन्द गोयल, श्रीगंगानगर

Tuesday, March 10, 2009

सृष्टी के आशीष बेटे के संग

माता के पिता
चरणों में जैसे ही
अर्पित किया
आदर मान का रंग,
सृष्टी के आशीष
स्वतः हो गए
बेटे के संग।

प्यासी गौरी लग गई अंग

लगा गुलाल
गया मलाल,
मन में उमड़ा
प्रीत का ज्वार
दोनों मिले
बाहें पसार।
----
आया भरतार
ना लगाया रंग
प्यासी गौरी
लग गई अंग।

Monday, March 9, 2009

रंग छोड़ कर अंग लगा ले

रंग छोड़ कर अंग लगा ले
मैं हो जाउंगी लाल रे,
मौका और दस्तूर भी है
तू बात ना मेरी टाल रे।
---
इन रंगों को तू भी जाने
मिनटों में बह जायेंगें,
प्रीत का रंग है सबसे पक्का
रगड़ रगड़ थक जायेंगें।

सकुचा कर सिमट गई

झीने कपडों पर

साजन ने मारी

प्रेम भरी पिचकारी,

सकुचा कर

अपने आप में

सिमट गई सजनी

सारी की सारी ।

Sunday, March 8, 2009

छोड़ दो सारे लफड़े

आज महिला दिवस है। सभी को बधाई। सब महिलाएं ताक़तवर बनें[ एक दो को छोड़कर,सॉरी, मज़बूरी है, सर को बचाना जरुरी है]। एक दूसरे की मदद करके महिला दिवस के होने का एहसास करें। महिलाओं को उनके इस दिवस पर समर्पित है यह चुटकी।

---- चुटकी----

मांजो बरतन
धोओ कपड़े,
एक दूजे की
हेल्प करो
छोड़ कर
सारे लफड़े।

Friday, March 6, 2009

चील,कौव्वे और गिद्ध


लोकतंत्र में
बार बार
हर बार
यही हो रहा है सिद्ध,
खरगोश, मेमने
चुनाव जीतते ही
बन जाते हैं
चील,कौव्वे और गिद्ध,
चुनाव के समय
डरे,सहमे जो
खरगोश,मेमने
जन जन के सामने
मिमियाते हैं,
चुनाव जीतने के बाद
चील,कौव्वे,गिद्ध
में तब्दील हो
देश और जनता को
नोच नोच कर खाते हैं,
लोकतंत्र की
विडम्बना देखो,
यही चील,कौव्वे,गिद्ध
अपने इस रूप में
जनसेवक कहलाते हैं।

Wednesday, March 4, 2009

पाक ने किया खुलासा

---- चुटकी----

पाक ने ख़ुद
ही कर दिया
सबूतों का खुलासा,
समझ सको तो
समझ लो
उसकी यह भाषा।

कुन्नर जी को मित्तल बंधुओं की बधाई
















इलाके के नेता गुरमीत सिंह कुन्नर को राजस्थान सरकार में कृषि विपणन [ स्वतंत्र प्रभार],जल संसाधन, इंदिरा गाँधी नहर परियोजना,जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, भूजल और सिंचित क्षेत्रीय विकास मंत्री बनाये जाने पर बधाई और कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गाँधी,महासचिव राहुल गाँधी तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत का आभार।
१--मित्तल जिनिंग एंड प्रेसिंग फैक्ट्री २--नीलकंठ इंडस्ट्रीज जैतसर हैड ऑफिस ५६ जी ब्लाक श्रीगंगानगर
२--होमलैंड सिटी प्रोजेक्ट १५ नैशनल हाई वे suratgadh road श्रीगंगानगर
--राजेन्द्र कुमार मित्तल,बलराज मित्तल,परविंदर मित्तल,संजीव मित्तल,राजेश मित्तल

मित्तल परिवार की कुन्नर को बधाई



इलाके के नेता गुरमीत सिंह कुन्नर को राजस्थान सरकार में कृषि विपणन [ स्वतंत्र प्रभार],जल संसाधन, इंदिरा गाँधी नहर परियोजना,जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, भूजल और सिंचित क्षेत्रीय विकास मंत्री बनाये जाने पर बधाई और कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गाँधी,महासचिव राहुल गाँधी तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत का आभार।
१--मित्तल जिनिंग एंड प्रेसिंग फैक्ट्री २--नीलकंठ इंडस्ट्रीज जैतसर हैड ऑफिस ५६ जी ब्लाक श्रीगंगानगर
२--होमलैंड सिटी प्रोजेक्ट १५ नैशनल हाई वे suratgadh road श्रीगंगानगर
--kasturi लाल मित्तल--ramesh kumar मित्तल

Monday, March 2, 2009

कुन्नर को बधाइयों का ताँता

जन जन में लोकप्रिय गुरमीत सिंह कुन्नर के मंत्री बनते ही उनको बधाई देने वालों का ताँता लग गया है। आज श्री कुन्नर के निकटम व्यक्तियों में से सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े प्रमुख व्यापारी रतन लाल बागडिया,श्याम लाल बागडिया,तिलक राज शर्मा और हनी शर्मा ने उनको बधाई देते हुए कांग्रेस के अध्यक्ष सोनिया गाँधी,राहुल गाँधी सहित राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का आभार व्यक्त किया है। जिन्होंने एक इमानदार और साफ छवि के नेता को मंत्री बनाकर उनका सम्मान किया ये सब आज अपने परिवार और मित्रों के साथ उनक स्वागत की तैयारियों में में लगे हुए हैं।
इनके व्यापारिक प्रतिष्ठान
१--कृष्णा एडिबल आयल मिल्स,रिको श्रीगंगानगर
२--कृष्णा ट्रेडर्स नई धानमंडी श्रीगंगानगर
३--जय श्रीराम ट्रेडिंग कम्पनी,श्रीगंगानगर
४--एस.एम.आर. लीजिंग एंड फाइनेंस लि० श्रीगंगानगर
५--शुभम कोमर्शियल कारपोरेशन नई धन मंडी श्रीगंगानगर
६--कृष्णा इंडस्ट्री पदमपुर
७--एस.एम.इंडस्ट्री रिको श्रीगंगानगर
८--गंगानगर कमोडिटी लिमिटेड श्रीगंगानगर
के समस्त संचालक और कर्मचारी आज गुरमीत सिंह कुन्नर को मंत्री बनने पर बधाई दे रहे हैं।

Saturday, February 28, 2009

जनता का विधायक कुन्नर अब मंत्री बना

विधायक गुरमीत सिंह कुन्नर को आज राजस्थान सरकार में राज्य मंत्री के रूप में शामिल कर लिया गया। श्री कुन्नर को जनता ने चुनाव लड़वाया और विजय बनाकर विधानसभा में भेजा। आज जयपुर में हुए मंत्री मंडल के विस्तार में श्री कुन्नर को स्थान मिल गया। उनके मंत्री बनने के चांस उसी समय लगने लगे थे जब उन्होंने श्री अशोक गहलोत को अपना समर्थन दे दिया था। श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले में ११ विधायक हैं। मंत्री बनने का सौभाग्य केवल श्री कुन्नर को ही मिला है।

किसी ने कहा अपशगुन किसी ने वरदान

ये क्या है?भ्रम,चमत्कार, या अन्धविश्वास। इस पोस्ट में हमने एक विडियो दिखाया था। शनि देव की जोत की लौ में कुछ अलग किस्म का नजारा दिखाई दे रहा था। कई बुद्धिजीवियों ने अपनी टिप्पणी इस पर दी। मगर जिन के घर ऐसा हुआ उनको तस्सली नही हुई। उन्होंने जगती जोत का विडियो कई अन्य जनों को दिखाया। एक आचार्य ने बताया कि यह तो शनि देव का प्रकोप है। हो सकता है आपने उसकी पूजा अर्चना में कोई कसर छोड़ दी हो। उसने इस प्रक्पो से निपटने के उपाय भी बताये। एक ज्योतिषी ने ने आचार्य की हाँ में हाँ मिली। उसने बताया कि वैसे जो शनिदेव न्याय के देवता है। हो सकता है आपके परिवार ने उनके सम्मान में कोई गुस्ताखी की हो। इस लिए थोड़ा बहुत तो संकट आ ही सकता है। उसने भी संकट से उबरने के उपाए बता दिए। एक ज्योतिषी आचार्य ने बार बार विडियो को देखा। उस स्थान को देखा जहाँ जोत जलाई गई। जोत को नमन किया। ठंडी साँस लेकर कहने लगे--भाई आपके तो भाग खुल गए। शनि महाराज ने जोत पर अपने आशीर्वाद का हाथ रख दिया है। एक महाराज जी ने जोत पर जो दिखाई दे रहा है उसको शेष नाग के फन का प्रतीक बताया। हर शनिवार शनि मन्दिर में जाने वालों को बताया गया तो वे विडियो की प्रति लेने को आतुर हो गए। कहने लगे--हमारे यहाँ तो कभी ऐसा दृश्य दिखाई नही दिया।परिवार को बहुत ही भाग्यशाली बताते हुए उहोने इस बात का धन्यवाद दिया जो उनको यह जोत देखने को मिली। इस प्रकार के किसी आदमी ने इस बात को भ्रम या सामान्य बात बात मानी। सब ने इसको शनि के आशीष और शनि के प्रकोप से जोड़ा।

Wednesday, February 25, 2009

लैला-मंजनू की आखिरी पनाहगाह


लैला-मंजनू का नाम कौन नहीं जानता! ये नाम तो अमर प्रेम का प्रतीक बन गया है। लैला-मंजनू के आत्मिक प्रेम पर कई फ़िल्म बन चुकी हैं। लैला-मंजनू कैसे थे? कहाँ के रहने वाले थे? इनके परिवार वाले क्या करते थे? कौन जानता है। लेकिन ये बात सही है कि इन दोनों प्रेमियों ने अपनी अन्तिम साँस श्रीगंगानगर जिले में ली। श्रीगंगानगर जिले के बिन्जोर गाँव के निकट लैला-मंजनू की मजार है। दोनों की मजार पर हर साल जून में मेला लगता है। मेले में नवविवाहित जोडों के साथ साथ प्रेमी जोड़े भी आते हैं। बुजुर्गों का कहना है कि बँटवारे से पहले पाकिस्तान साइड वाले हिंदुस्तान से भी बहुत बड़ी संख्या में लोग मेले में आते थे। मेले के पास ही बॉर्डर है जो हिंदुस्तान को दो भागों में बाँट देता है। राजस्थान का पर्यटन विभाग इस स्थान को विकसित करने वाला है। लैला-मंजनू की मजार को पर्यटन स्थल बनाने के लिए दस लाख रुपये खर्च किए जायेंगें।अगर इस स्थान का व्यापक रूप से प्रचार किया जाए तो देश भर से लोग इसको देखने आ सकते हैं। मजार सुनसान स्थान पर है ,इसलिए आम दिनों में यहाँ सन्नाटा ही पसरा रहता है।
लैला -मंजनू की इसी मजार के बारे में जी न्यूज़ चैनल पर प्राइम टाइम में आधे घंटे की स्टोरी दिखाई गई। सहारा समय भी इस बारे में कुछ दिखाने की तैयारी कर रहा है।

Tuesday, February 24, 2009

नफरत ना करना मेरी मां




उठ मां,
मुझ से दो बातें करले
नो माह के सफर को
तीन माह में विराम
देने का निर्णय कर
तू चैन की नींद सोई है,
सच मान तेरे इस निर्णय से
तेरी यह बिटिया बहुत रोई है,
नन्ही सी अपनी अजन्मी बिटिया के
टुकड़े टुकड़े करवा
अपनी कोख उजाड़ दोगी!
सुन मां,
बस इतना कर देना
उन टुकडों को जोड़ कर
इक कफ़न दे देना,
ज़िन्दगी ना पा सकी
तेरे आँगन की चिड़िया
मौत तो अच्छी दे देना,
साँसे ना दे सकी ऐ मां,मुझे तू
मृत रूप में
अपने अंश को देख तो लेना
आख़िर
तेरा खून,तेरी सांसों की सरगम हूँ,
ऐ मां,मुझसे इतनी नफरत ना करना
---
लेखक--डॉ० रंजना
३१६/अर्बन एस्टेट सैकिंड
भटिंडा[पंजाब]
यह कविता डॉ० रंजना के भाई डॉ० विवेक गुप्ता के बताकर यहाँ पोस्ट की गई है।

Sunday, February 22, 2009

ये क्या है? भ्रम,चमत्कार,या अन्धविश्वास

कई बार ऐसा होता है जब हमें अलग सा लगता या महसूस होता है। लेकिन व्यस्त जिंदगी के कारण हम उस बात को भुला देते हैं,या जान बूझकर उसकी चर्चा नहीं करते। कल शनिवार को भी एक परिवार ने ऐसा ही देखा और महसूस किया । परिवार ने अपने पूजा घर में शनि देवता की फोटो के सामने रुई से बनी पतली सी जोत जगा दी। कुछ क्षण के बाद जोत ने कुछ भिन्न प्रकार का रूप ले लिया। जोत की पतली सी नोक पर "कुछ" दिखाई देने लगा। काले रंग का यह "कुछ"साफ साफ दिखाई दे रहा था। अब जोत की अग्नि उसके चारों तरफ़ से आने लगी। जबकि इस प्रकार की जोत की लौ पतली और सीधी होती है। जिस घर में ऐसा हुआ वे पूजा पाठ में यकीन तो करते हैं लेकिन अन्धविश्वासी नहीं हैं। जो कुछ है वह आंखों के सामने है इसलिए उसको केवल कपोल कल्पना भी नहीं कहा जा सकता। अब आख़िर ये है क्या? ये जानने की जिज्ञासा के चलते ही उसका विडियो यहाँ पोस्ट किया गया है। ताकि समझदार,ज्ञानीजन ये बता सकें की आख़िर ये है क्या।

Saturday, February 21, 2009

छुआछूत के मामले बढे हैं देश में

नेशनल एस सी/एस टी कमीशन के चेयरमेन बूटा सिंह ने लोकसभा चुनाव श्रीगंगानगर से लड़ने की बात कही है।
उन्होंने प्रेस से कहा कि वे १९८० में इंदिरा गाँधी के साथ इस इलाके में आए थे। तब मैं उनका ड्राईवर,चपरासी,सचिव सबकुछ था। तब मैंने इस इलाके को देखा। तब से मेरे मन में इस इलाके की नुमाइंदगी करने की इच्छा है। बूटा सिंह के अनुसार इस इलाके का उतना विकास नहीं हुआ जितना होना चाहिए। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद से छुआछूत के मामलों में बढोतरी हुई है। छुआछूत कई जगह तो साफ नजर आता है। उन्होंने कहा कि आज तक इस कानून में किसी को भी सजा नहीं हुई है। चेयरमेन ने बताया कि कमीशन अपनी रिपोर्ट जल्दी ही सरकार को देगा।
बूटा सिंह के अनुसार राजस्थान के विधायक किरोडी लाल मीणा और पूर्व केन्द्रिय होम मिनिस्टर शिवराज पाटिल ने भी उनसे अपने इलाके से चुनाव लड़ने का ऑफर दिया है। लेकिन मैं श्रीगंगानगर से चुना लड़ना चाहता हूँ। बूटा सिंह ने राजस्थान के जालौर लोकसभा क्षेत्र का संसद में प्रतिनिधित्व किया है। जालौर अब सामने सीट हो गई जबकि श्रीगंगानगर एस सी के लिए रिजर्व है।

Friday, February 20, 2009

शाप दे दिया दादा ने

---- चुटकी----

सोम दा ने
दे दिया
सांसदों को शाप,
सदन में करते हो
हंगामा, इसलिए
हार जाएं आप।

विचार नही स्टार चाहिए

---- चुटकी----

विचार नहीं,खेल
फ़िल्म और टीवी के
बड़े स्टार चाहिए,
सांसद बनना है तो
आप भी हमारे
झंडे के नीचे आइये।

Thursday, February 19, 2009

गीतकार नीरज ने किया विमोचन

राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी राजेन्द्र कुमार मीणा के प्रथम काव्य संग्रह आबशार-ऐ-अश्क का विमोचन प्रख्यात गीतकार,कवि डॉ० गोपाल दास नीरज ने अलीगढ में किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि इस पुस्तक की सुगंध राजस्थान में ही नहीं पूरे देश में फैलेगी। श्री नीरज ने कहा कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में आज पतन का दौर चल रहा है। राजनीति और साहित्य दोनों भ्रमित हैं। आज पैसा ही सब कुछ हो गया है। श्री मीणा ने कहा कि श्री नीरज जी के आशीर्वाद से ही मेरी कल्पनाएँ पुस्तक के रूप में आ सकीं हैं। अलीगढ में कवि सम्मलेन भी हुआ। [विडियो में पुस्तक का विमोचन करते हुए श्री नीरज,कवि सम्मलेन में कविता पाठ करते हुए श्री नीरज जी, श्री मीणा जी।]

श्री नीरज जी शब्दों में"श्री राजेन्द्र कुमार मीणा 'राजेन्द्र' की कुछ कवितायें मैंने सुनीं। श्री राजेन्द्र एक प्रशासनिक अधिकारी हैं। आश्चर्य की बात है कि अपनी प्रशासनिक सेवा में अति व्यस्त रहते हुए भी सौन्दर्य और प्रेम की तथा प्रेम पीड़ा की जो कवितायें लिखी हैं वैसी मैंने पहले न तो कभी सुनीं और न कभी किसी पत्रिका में पढ़ी। वे सहज कवि हैं और ऐसा लगता है कि कवितायें उन्होंने नहीं बल्कि उनके भीतर बैठी हुई गहन अनुभूतियों के कारण स्वंय लिख-लिख गईं। वे मैथिल कोकिल विद्यापति के आधुनिक रूप में मुझे सदा ही प्रभावित करते रहेंगें और सदा याद आते रहेंगें। इस आधुनिक विद्यापति को मेरी हार्दिक शुभकामनायें।" यह सब श्री मीणा की पुस्तक में लिखा हुआ है।

आतंकवाद के दो नाम

---- चुटकी---

पाकिस्तान
कहो या
तालिबान,
आतंकवाद हैं
दोनों नाम।

Wednesday, February 18, 2009

ये जो जिंदगी है

दिल्ली के निकट बहादुरगढ़ और रोहतक के बीच एक क़स्बा है सांपला। इस कस्बे या मंडी में यूँ तो हजारों लोग रहते हैं लेकिन जिक्र केवल नत्थू राम बंसल का। इसकी वजह तो है ही। वजह उनकी और उनके परिवार वालों की हिम्मत। सालों पहले नत्थू राम दो तीन दुर्घटनाओं का ऐसा शिकार हुआ कि उसकी कमर के नीचे का हिस्सा एक प्रकार से पत्थर का हो गया। बस, यह आदमी खड़ा और पड़ा रहता है। बिस्तर पर पड़ा रहेगा या बैसाखी लेकर खड़ा रहेगा। पैर मुड़ते नहीं,कमर झुकती नहीं। घर में ऐसे चलता है जैसे कीड़ी। कहीं जाना हो तो सामान ढोने वाले रिक्शा में "लाद" कर ले जाया जाता है। इसके बावजूद इनको ना तो जिंदगी से कोई शिकायत है ना भगवान से। इनका पूरा परिवार है, समाज में रुतबा है। इनकी पत्नी हो या बेटे किसी ने आज तक उनको ये अहसास नही होने दिया कि वे "पत्थर" हो चुके। उनकी एक आवाज से उनके परिवार वाले उनके पास पहुँच जाते है। ऐसे आदमी उन लोगों के लिए प्रेरणा होतें है जो थोड़ा बहुत चला जाने के गम में ज़िन्दगी से हार मान कर बैठ जाते हैं। इनके घर वालों ने इनका इलाज तो बहुत करवाया मगर जब कुछ बात नहीं बनी तो इसी को प्रसाद मान कर स्वीकार कर लिया। इनको इन दो लाइनों के साथ सलाम-- ना मजा मौज उड़ाने में है,ना मजा गम उठाने में है,गर है चैन "मजबूर", तो दिल को समझाने में है।"

इनका जिक्र भी लाजिमी है

दिल्ली से श्रीगंगानगर के लिए चलने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन में ऐसा बहुत कुछ देखने और महसूस करने को मिला जिसका जिक्र करना लाजिमी सा लगा। ट्रेन के डिब्बे में मैले -कुचैले,फटे कपड़े पहने, बदन पर लटकाए कोई लड़का डिब्बे की सफाई करता हुआ कुछ पाने की आस में हाथ फैलाता है। कोई हाथ पर रखता है कोई उसकी और से मुहं फेर लेता है। कई दयालु यात्री उसको खाने को दे देते हैं। पत्थर के दो छोटे टुकड़े बजाकर गाना सुनाते हुए कोई लड़का या लड़की डिब्बे में आकर आपका ध्यान अपनी ओर खींच सकता है। गाने चाहे कानों में रस ना घोले मगर पत्थर के दो टुकड़े बजाने के अंदाज औरआवाज अवश्य आंखों , कानों को अच्छे लगते हैं। कुछ समय बाद आपको चार पाँच साल के लड़का लड़की जिम्नास्टिक करते दिखेंगें। ये सब कुछ ना कुछ करके, या अपनी टूटी फूटी कला का प्रदर्शन करके कुछ पाने के लिए यात्रियों के आगे हाथ फैलाते है। इनको भिखारी नही कहा जा सकता। कई यात्री इनसे सहानुभूति दिखाते हैं कई इनके बारे में अपमान जनक टिप्पणी करते हैं। ये तो साबित है कि ये भिखारी नही हैं। सम्भव है कभी ऐसा हो कि इनमे से कोई किसी फ़िल्म का पात्र नजर आए। क्योंकि भारतीय गरीबी की तो विदेशों में बहुत अधिक मांग है। कुछ भी हो ये बच्चे भिखारियों से तो बेहतर हैं। फ़िर भी ऐसे बच्चों के लिए किसी ना किसी को तो कुछ करना ही चाहिए। कहीं ऐसा ना हो कि इनका जीवन इसी प्रकार इस ट्रेन में ही समाप्त हो जाए।
ट्रेन के शौचालयों में अश्लील वाक्य भी बहुत अधिक मात्र में लिखे हुए थे। लिखने वाले कितनी गन्दी मानसिकता के होंगें यह आसानी से समझा जा सकता है। लेकिन ट्रेन की सफाई के जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों को तो इनको साफ़ कर देना चाहिए।

Friday, February 13, 2009

मान गया पाक

---- चुटकी---

लो जी
मान गया पाक,
मगर उसका
बिगाड़
क्या लेंगें आप।

वेलेंटाइन डे,दूसरों की बहिन बेटियों के साथ

कोई भी आदमी ये तो पसंद करताहै कि वो किसी सुंदर सी लड़की/महिला के साथ इधर उधर मटर गश्ती करे,फ़िल्म देखने जाए, होटल में बतियाए,ऐश मरे। लेकिन ऐसा करने वालों में से कोई ये बर्दाश्त नहीं कर सकता कि कोई उसकी बहिन बेटी के साथ ऐसा करे। मतलब साफ़ है कि इस मामले में सभी के पास दो तराजू होते है। लेने के लिए अलग देने के लिए अलग। यही मानसिकता वेलेंटाइन डे का समर्थन करने वालों की है। वेलेंटाइन डे के हिमायती अगर इसको इतना गरिमामय मानते हैं तो वे अपनी बेटियों और बहिनों को आगे करे। लड़कों को पीले चावल देकर बुलाएँ कि आओ भई मनाओ वेलेंटाइन डे, हाजिर हैं हमारी बहिन बेटियाँ। फ़िर उनको पता लगेगा कि इसका क्या मतलब होता है। जो आजादी तुम दूसरों के लिए मांग रहे हो वह अपनी लड़कियों और बेटियों को क्यों नहीं देते? कौन रोकता है तुमको वेलेंटाइन डे मनाने से मगर शरुआत घर से हो तो लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी। कथनी और करनी में अन्तर तो नही होना चाहिए। भारत की गरिमा को कम करने में लगे ये मक्कार लोग वेलेंटाइन डे के बहाने दूसरों की बहिन बेटियों को निशाना बनाते है। मीडिया से जुड़े वो लोग जो ऐसे लोगों को कवर करतें हैं उनसे सीधे शब्दों में पूछे कि क्या उनकी लड़की भी वेलेंटाइन डे मनाने अपने घर से निकली है। या उसको ऐसा करने की इजाजत दी गई है। सच तो ये है कि " जाके पैर न फटी बेवाई,वो क्या जाने पीर पराई" जब वेलेंटाइन डे के समर्थक लोगों की लड़कियां अपने यारों के साथ ऐश करती हुई उनको दिखेगी तब उनको पता चलेगा कि ये क्या है। आज मिडिल क्लास परिवारों में वेलेंटाइन डे को लेकर चिंता रहती है कि पता नहीं कौन क्या कर दे। छोटे शहरों के अभिभावकों को फ़िक्र अधिक रहता है।

Wednesday, February 11, 2009

चड्डी साड़ी में घमासान

---- चुटकी----

वेलेंटाइन डे पर
चड्डी और साड़ी में
हो गया घमासान,
कोई जीते कोई हारे
दाव पर लगी है
नारी की शान।

उधार का आयातित प्रेम दिवस

हमारे महान हिंदुस्तान को पता नहीं क्या हो गया या कुछ सिरफिरे लोगों ने कर दिया कि सड़े गले,दुर्गन्ध वाले विदेशी रीति रिवाजों को अपने अन्दर समाहित करने में अपने आपको गौरवान्वित महसूस करता है। यहाँ बात करेंगें वेलेंटाइन डे की। जिस हिंदुस्तान में सदियों से प्रेम,प्रीत,स्नेह,लाड ,प्यार की नदियाँ बहती रहीं हैं वह यह डे प्रेम सिखाने आ गया। या यूँ कहें कि प्रेम के नाम पर गन्दगी फैलाने आ गया। हिंदुस्तान तो प्रीत का दरिया है। कौनसा ऐसा सम्बन्ध है जो प्रेम पर नहीं टिका हुआ। सोहनी-महिवाल को कोई भूल सका है क्या? राधा -कृष्ण की प्रीत की तो पूजा जाता है। मीरा की भक्ति भी तो प्रेम का ही एक रूप थी। सुदामा-कृष्ण,श्रीराम और बनवासी निषाद राज की मित्रता का प्रेम क्या प्रेम नहीं था। अर्जुन से प्रेम था तभी तो कृष्ण ने उसका सारथी बनना स्वीकार किया। लक्ष्मण-उर्मिला के प्यार को लिखने के लिए तो कोई शब्द ही नहीं है। श्रवण कुमार का अपने माता-पिता के प्रति प्यार तो इतिहास बना हुआ है। श्रीराम और सुग्रीव ने अपनी मित्रता के प्रेम को कैसे निभाया कौन नहीं जानता। भाई के प्रति भाई के प्रेम की कहानी तो रामचरितमानस के पन्ने पन्ने पर है। प्रेम तो वह है जिसका कोई आदि और अंत ही नहीं है।ये नाम तो वो हैं जो आम हिन्दुस्तानी जानता है। इसके अलावा भी ना जाने कितने ही नाम होंगें जो प्यार को अमर बनाकर चले गए। पता नहीं संस्कार वान हिन्दुस्तानियों ने अपने सास्वत सत्य प्रेम को छोड़कर झूठे,क्षणिक वेलेंटाइन मार्का प्यार को क्यों अपनाना शुरू कर दिया जो यह कहता है बस एक दिन प्रेम करो और उसको भी लड़कियों से जोड़ दिया। जबकि हिंदुस्तान में तो हर पल हर क्षण प्रेम, प्यार प्रीत की गंगा बहती है।
पता नहीं यह आयातित प्रेम हमारे लड़के-लड़कियों को कहाँ लेकर जाएगा। एक दिन के प्रेम में शालीनता,गरिमा की तो उम्मीद ही नहीं की जा सकती। जबकि हिन्दुस्तानी प्रेम की तो नीवं ही गरिमा और शालीनता है। किसी ने कहा है--"ये कोई खेल नहीं है जिंदगी के जीने का, लगी है शर्त तो सिक्का उछल कर देखो"।

Tuesday, February 10, 2009

फाल्गुन में सावन की सी रिमझिम

प्रकृति और दिल पर किसी का कोई बस नहीं है। ये दोनों कब क्या कर बैठें कोई नहीं जानता। श्रीगंगानगर में आज ऐसा ही हुआ। सुबह का नजारा प्रकृति का सौन्दर्य अपने अन्दर समेटे हुए था। आसमान में यहाँ से वहां तक काली घनघोर घटायें इस सौन्दर्य में चार चाँद लगाती दिखीं। हलकी बूंदा बांदी शहर को धीरे धीरे भिगोने में लगी हुई थी। आज फाल्गुन मास का पहला दिन था। लेकिन प्रकृति सावन का दृश्य दिखाने को लालायित थी। रात को यह पोस्ट लिखने तक मौसम ऐसा ही बना हुआ था। ठण्ड जो लगभग विदा ले चुकी थी फ़िर से द्वार पर आ खड़ी हुई। भोर से अब तक शहर प्रकृति के इस अनुपम उपहार से भीगता रहा।सूरज ने बादलों की ओट में ही पूर्व से पश्चिम तक का अपना सफर तय किया। आज सूरज की नहीं चली। दिन में भी सांझ का अहसास होता रहा। टाइम ने बताया कि यह शाम का वक्त है। वैसे श्रीगंगानगर की सर्दी और गर्मी दोनों गजब की होती है। सर्दी में न्यूनतम तापमान शून्य के आसपास और गर्मी में अधिकतम तापमान ५० डिग्री सेल्सियस के निकट रहता है। आज लोगों ने प्रकृति का आनंद भी लिया और परेशान होने वाले इस बरसात से परेशान भी हुए। मगर प्रकृति को इस से क्या!

जाते जाते नई शुरुआत

श्रीगंगानगर के निवर्तमान एसपी आलोक विशिस्ट आज जाते जाते यहाँ एक नई शुरुआत कर गए। उन्होंने मीडिया कर्मियों को अनौपचारिक बातचीत के लिए बुलाया। उन्होंने जिस प्रकार से मीडिया को बुलाया था बात भी उसी प्रकार की , बिना लाग लपेट के। वे उस कुर्सी पर नहीं बैठे जो उनके लिए होती है। हालाँकि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने उनसे बार बार अपनी चेयर पर बैठने का आग्रह किया लेकिन वे नहीं माने। उन्होंने साफ कहा कि वे आज केवल अनौपचारिक बात चीत के लिए ही आयें हैं। श्री आलोक जी किसी की आलोचना से बचे, इलाके की जनता की सकारात्मक सोच की सराहना की। इसी बात चीत के दौरान नवनियुक्त एसपी उमेश चन्द्र दत्ता भी आ गये। एक घंटा तक विभिन्न मसलों पर बात चीत हुई। उन्होंने श्रीगंगानगर इलाके को बहुत अच्छा बताया। सभी मीडिया कर्मियों ने उनको गुड लक कहा। श्रीगंगानगर में ऐसा पहली बार हुआ जब निवर्तमान एसपी ने मीडिया कर्मियों को अनोपचारिक बात चीत के लिए बुलाया। कई साल पहले पत्रकार संगठन जाने वाले एसपी को विदाई पार्टी देकर नए एसपी का स्वागत किया करते थे।
नए एसपी उमेश चन्द्र से भी इसी मूड में चर्चा हुई। उनसे पूछा गया कि क्या वे भी जिला कलेक्टर की तरह अपना मोबाइल फोन नम्बर जनता के लिए सार्वजानिक करना चाहेंगे? उन्होंने कहा कि वे पहले यहाँ के सिस्टम को समझ कर फ़िर इस बारे में कोई बात करेंगें। नए एसपी मूल रूप से चंडीगढ़ के रहने वालें हैं।

Monday, February 9, 2009

भिखारिन के जज्बे को सलाम


आदमी थोड़ा देकर बहुत नाम कमाने की भावना दिल और दिमाग में रखता है। बहुत से ऐसे भी हैं जो सौ रुपल्ली का सामान अस्पताल में बाँट कर दो सौ रूपये उसके प्रचार में लगा देते हैं। मगर यह पोस्ट उनको समर्पित नहीं है। यह समर्पित है उस भिखारिन को जिसको भिखारिन कहना ही नही चाहिए। श्रीगंगानगर से प्रकाशित "प्रशांत ज्योति" दैनिक अखबार में एक ख़बर है। ख़बर यह बताती है कि एक भिखारिन ऐसे लोगों के लिए लंगर लगाती है जो असहाय है। इस भिखारिन के जज्बे को सलाम करते हुए यही कहना है कि हमें ऐसे लोगों से कुछ तो प्रेरणा लेनी ही चाहिए। "मजबूर" ने अपनी किताब "डुबकियां" में लिखा है---"कुछ देने से सब कुछ नहीं मिलता मजबूर,सब कुछ देने से कुछ मिलता है जरुर"। वे ये भी कहतें हैं--" हर जिंदगी है मुश्किल,हर जिंदगी है राज, मुझ से हजार होंगें,मुझ सी दास्ताँ नहीं"।

पाक में जिन्ना,भारत में राम जी

---- चुटकी----

पाक में जिन्ना
भारत में
श्रीराम जी,
आडवानी जी का
पता नहीं
कैसे बनेगा काम जी।

Sunday, February 8, 2009

पाक,तालिबान,जेहाद और कसाब

---- चुटकी----

पाक,तालिबान,
जेहाद और कसाब,
इसके सिवा
न्यूज़ चैनलों में
और
क्या है जनाब।

Friday, February 6, 2009

मंदी में महंगा सामान

--- चुटकी----

क्रिकेट खिलाड़ियों के
खूब लगे दाम,
इतनी मंदी में
इतना महंगा
मिला सामान।

--गोविन्द गोयल

धन्यवाद आपका और उनका


सीमा जी, आपका धन्यवाद। धन्यवाद इस बात का कि आपने मुझे इस बात की जानकारी दी कि मेरे ब्लॉग और पोस्ट "मृत शरीर का दान" की चर्चा बैंगलोर से प्रकाशित "दक्षिण भारत" नामक अखबार में हुई है। धन्यवाद अखबार के सम्पादक का भी जिन्होंने मृत देह दान करने वाले परिवार की भावना को समझा और उसे अपने अखबार में स्थान दिया। उम्मीद है कि मेरा विनम्र धन्यवाद अखबार संचालकों तक पहुँच जाएगा।

Thursday, February 5, 2009

मृत शरीर को दान किया

किसी ने कहा है " हट के दिया,हट के किया याद रहता है। हमारे हिंदुस्तान मृत शरीर के प्रति आदर मान का भाव है। डैड बॉडी चाहे किसी भी धर्म से सम्बन्ध रखने वाले इन्सान की हो उसका निरादर नही किया जाता। हम तो बॉर्डर पर रहतें है इसलिए जानते हैं कि बॉर्डर पर जब कोई पाक घुसपैठिया मारा जाता है तो उसकी डैड बॉडी का भी उसके धर्म के अनुरूप अन्तिम संस्कार किया जाता है। यह तो आम बात है। आज जिसके बारे में लिखा जा रहा है वह जरा हट के है। श्रीगंगानगर में एक परिवार में एक महिला की मौत हो गई। मौत ही एक सच्चाई है बाकी सब झूठ है। महिला के परिजनों ने डैड बॉडी का अन्तिम संस्कार नहीं करके उसको मैडिकल कॉलेज को दान कर दिया । मृत महिला के परिजनों ने शव की अन्तिम यात्रा निकली। अर्थी को मरघट तक लेकर गए । वहां उसके अन्तिम दर्शन करके डैड बॉडी को मेडिकल कॉलेज को दान में दे दिया गया। जिस देश में धर्म के प्रति अंध विश्वाश हो। उस देश में अपने परिजन की मृत देह का अन्तिम संस्कार करने की बजाय उसको किसी के हवाले कर देना अपने आप में जरा हट के है। हजारों साल पहले एक महात्मा दाधीच ने भी अपने शरीर को दान कर दिया था। "तन का बंधन दुनियादारी,रूह का मिलना प्यार,डाल झुके तो जीत तुम्हारी,उछल तोड़ना हार।

Wednesday, February 4, 2009

फाल्गुन कैसे गुजरेगा जो नहीं आए भरतार

दरवाजे पर खड़ी खड़ी
सजनी करे विचार
फाल्गुन कैसे गुजरेगा
जो नहीं आए भरतार।
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फाल्गुन में मादक लगे
जो ठंडी चले बयार
बाट जोहती सजनी के
मन में उमड़े प्यार।
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साजन का मुख देख लूँ
तो ठंडा हो उन्माद,
"बरसों" हो गए मिले हुए
रह रह आवे याद।
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प्रेम का ऐसा बाण लगा
रिस रिस आवे घाव
साजन मेरे परदेसी
बिखर गए सब चाव।
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हार श्रंगार सब छूट गए
मन में रही ना उमंग
दिल पर लगती चोट है
बंद करो ये चंग।
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परदेसी बन भूल गया
सौतन हो गई माया
पता नहीं कब आयेंगें
जर जर हो गई काया।
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माया बिना ना काम चले
ना प्रीत बिना संसार
जी करता है उड़ जाऊँ
छोड़ के ये घर बार।
----
बेदर्दी बालम बड़ा
चिठ्ठी ना कोई तार
एस एम एस भी नहीं आया
कैसे निभेगा प्यार।

Tuesday, February 3, 2009

पचास घंटे का अवरोध

श्रीगंगानगर में ५० घंटे बाद इन्टरनेट सेवा बहाल हो सकी। शनिवार की शाम अचानक भारतीय दूर संचार निगम की केबल कटने से बहुत बड़े इलाके में इन्टरनेट ठप्प हो गई। इस से बड़ी संख्या में उपभोग्ता प्रभावित हुए। दो दिन तक साइबर बंद रहे। लेकिन नगर से प्रकाशित होने वाले कई प्रमुख अखबारों में इस बात का कोई जिक्र तक नहीं। जबकि निगम के ऑफिस में इस बारे में शिकायतों का अम्बार लगा हुआ था। सन्डे को ऑफिस बंद था कुछ नही हो सका। सोमवार को ऑफिस खुला तब खराबी को ठीक करने का काम शुरू हुआ जो रात को ओके हो सका। सन्डे को तो निगम की फोन सेवा भी अस्त व्यस्त रही। इन्टरनेट की चाल तो अभी भी नोर्मल नहीं हो पाई है। हाँ इतना जरुर है कि कुछ करने लायक जरुर हो गए। साइबर संचालकों को दो दिन ठाले बैठे रहना पड़ा, पर निगम को क्या फर्क पड़ता है।

Saturday, January 31, 2009

राजनीति में ऐश

---- चुटकी----

अपनी अदाओं को
कितना
करवाएगी कैश,
राजनीति में ऐश

गोविन्द गोयल, श्रीगंगानगर

Friday, January 30, 2009

छोटी बात पर बड़ा लफड़ा

--- चुटकी----

विधायक को
पांच लाख की
रिश्वत लेते पकड़ा,
उफ़! छोटी सी
बात और
इतना बड़ा लफड़ा।
----
लोकायुक्त पुलिस ने कर्नाटक में भाजपा विधायक वाई सम्पंगी को पाँच लाख रूपये की रिश्वत लेते हुए बेंगलुरु स्थित एम एल ऐ क्वार्टर से पकड़ा गया। प्रदेश में विधायक के रिश्वत लेने का यह पहला मामला है। [ पकड़े जाने का पहला होगा।]

Thursday, January 29, 2009

सम्मान मिलने से पहले सम्मान


श्रीगंगानगर के प्रो० एस एस महेश्वरी को पदमश्री दिए जाने की घोषणा के साथ ही यहाँ उनके सम्मान की होड़ लग गई है। श्री महेश्वरी को सम्मानित करने का उत्साह इतना अधिक है कि राजकीय शोक भी ध्यान नही रहता। भारतीय स्टेट बैंक की ओर से बुधवार को श्री महेश्वरी के सम्मान में बैंक परिसर में समारोह आयोजित किया गया। बैंक के मुख्य प्रबंधक [निरीक्षण] महेश शर्मा,ब्रांच मैनेजर शिवरतन सोमानी, चीफ मैनेजर बी एल रावत आदि ने श्री महेश्वरी को सम्मान प्रतीक भेंट किया। श्री महेश्वरी बैंक के खाताधारक हैं। श्री महेश्वरी को हालाँकि अभी पदमश्री मिला नहीं है मगर मीडिया ने उनके नाम के आगे पदमश्री लिखना शुरू कर दिया है।

चुनावी लालीपॉप है भाई

--- चुटकी----

डीजल,पेट्रोल,गैस
के दामों में कमी
तो चुनावी लालीपॉप
है मेरे भाई,
चुनाव के बाद
वसूल कर लेंगें
एक एक पाई।

Monday, January 26, 2009

पदमश्री सम्मान की गरिमा

"सुनहू भरत भावी प्रबल बिलख कहें मुनिराज,लाभ -हानि,जीवन -मरण ,यश -अपयश विधि हाथ" रामचरितमानस की ये पंक्तियाँ श्री एस एस महेश्वरी को समर्पित, जिनको पदमश्री सम्मान देने की घोषणा की गई है।यह मेरे लिए गर्व,सम्मान,गौरव... की बात है। क्योंकिं श्री महेश्वरी मेरे शहर के हैं। लेकिन दूसरी तरफ़ इस बात का अफ़सोस भी है कि क्या पदमश्री की गरिमा इतनी गिर गई की यह किसी को भी दिया जा सकता है। श्री महेश्वरी जी को यह सम्मान सामाजिक कार्यों के लिए दिया जाएगा। उनके सामाजिक कार्य क्या हैं ये सम्मान की घोषणा करने वाले नहीं जानते। अगर जानते तो श्री महेश्वरी को यह सम्मान देने की घोषणा हो ही नहीं सकती थी।

उन्होंने कुछ समाजसेवा भावी व्यक्तियों के साथ १९८८ में एक संस्था "विद्यार्थी शिक्षा सहयोग समिति"का गठन किया। समिति ने आर्थिक रूप से कमजोर उन बच्चों को शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता दी जो बहुत होशियार थे। यह सहायता जन सहयोग से जुटाई गई।इसमे श्री महेश्वरी जी का व्यक्तिगत योगदान कितना था? वैसे श्री महेश्वरी जी एक कॉलेज में लेक्चरार है और घर में पैसे लेकर कोचिंग देते हैं। श्रीगंगानगर में ऐसे कितने ही आदमी हैं जिन्होंने समाज में महेश्वरी जी से अधिक काम किया है। स्वामी ब्रह्मदेव जी को तो इस हिसाब से भारत रत्न मिलना तय ही है। उन्होंने ३० साल पहले श्रीगंगानगर में नेत्रहीन,गूंगे-बहरे बच्चों के लिए काम करना शुरू किया। आज तक उनके संरक्षण में कई सौ लड़के लड़कियां अपने पैरों पर खड़े होकर अपना घर बसा चुके हैं। जिनसे समाज तो क्या उनके घर वालों तक को कोई उम्मीद नहीं थी आज वे सब की आँख की तारे हैं। सम्मान की घोषणा करने वाले यहाँ आकर देखते तो उनकी आँखें खुली की खुली रह जाती। आज स्वामी जी के संरक्षण में नेत्रहीन,गूंगे-बहरे बच्चों की शिक्षा के लिए क्या किया जा रहा है वह शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। पता नहीं ऐसे लोग क्यूँ सम्मान देने वालों को नजर नहीं आते। आज नगर के अधिकांश लोगों को श्री महेश्वरी के चयन पर अचम्भा हो रहा है। अगर श्री महेश्वरी को इस सम्मान का हक़दार मन जा रहा है तो फ़िर ऐसे व्यक्तियों की तो कोई कमी नही है।

यहाँ बात श्री महेश्वरी जी के विरोध की नहीं पदमश्री की गरिमा की है। सम्मान उसकी गरिमा के अनुकूल तो होना ही चाहिए ताकि दोनों की प्रतिष्ठा में और बढोतरी हो, लेकिन यहाँ गड़बड़ हो गई। सम्मान की प्रतिष्ठा कम हो गई, जिसको दिया जाने वाला है उसकी बढ़ गई। मैं जानता हूँ कि जो कुछ यहाँ लिखा जा रहा है वह अधिकांश के मन की बात है किंतु सामने कोई नहीं आना चाहता। मेरी तो चाहना है कि अधिक से अधिक इस बात का विरोध हो और सरकार इस बात की जाँच कराये कि यह सब कैसे हुआ। मेरी बात ग़लत हो तो मैं सजा के लिए तैयार हूँ। यह बात उन लोगों तक पहुंचे जो यह तय करतें हैं कि पदमश्री किसको मिलेगा।

Sunday, January 25, 2009

देश प्रेम का मौसम आ गया

मेरे दिल में शहीद भगत सिंह की आत्मा ने प्रवेश कर लिया है। वह जय हिंद का नारा बुलंद कर रही है। जी करता है पाक में जाकर उसकी मुंडी मरोड़ कर किस्सा ख़तम कर दूँ। कमशब्दों में कहूँ तो मेरे अन्दर फिल्मी स्टाइल वाला देशप्रेम का जज्बा पैदा हो गया है। ना, ना, ना , ग़लत मत सोचो, मैं बिल्कुल ठीक हूँ। मुझे कोई दौरा नहीं पड़ा और ना ही मैंने कोई देशप्रेम से ओत प्रोत फ़िल्म देखी है। यह भाव तो आजकल अख़बार पढ़ कर आ गए। जिनमे इन दिनों इस प्रकार के लेख छप रहे हैं कि मेरे जैसे एक पाव वजन वाले इन्सान केमुहं से इन्कलाब जिंदाबाद के नारे बुलंद हो रहे हैं। चिंता की कोई बात नहीं,ये भाव स्थाई नहीं है। ये तो कल तक हवा हो जायेंगें। अगर दो चार दिन देशप्रेम के लेख से ऐसे भाव स्थाई रहते तो देश की ऐसी हालत तो नहीं होती। पहले गोरे थे, अब काले हैं,जन जन के हाल तो वही पुराने वाले हैं। देश में पहले चार मौसम हुआ करते थे,फिल्मो ने पांचवा मौसम प्यार का कर दिया और अब छठा मौसम देशप्रेम का हो जाता है २६ जनवरी और १५ अगस्त के आस पास। इस बीच पाकिस्तान हिम्मत कर दे तो ऐसा मौसम तब भी बन जाता है। इसको मजाक मत समझो यह गंभीर बात है। किसी में एक घटना से देश प्रेम पैदा हो जाए ऐसे बच्चे पैदा करने वाली कोख है क्या? देश प्रेम को मजाक के साथ साथ बाज़ार बना दिया गया है। बच्चों में देश के प्रति प्रेम,समर्पण तभी आएगा जब हम उनको हर रोज इस बारे में बतायेंगें। किसी ने कहा भी है--करत करत अभ्यास तो जड़ मति होत सूजान,रस्सी आवत जात तो सिल पर पड़त निशान। स्कूलों में इस प्रकार की व्यवस्था हो कि बच्चा बच्चा अपने देश और उसके प्रति उसके क्या कर्तव्य हैं,उसके बारे में जाने। उसके टीचर,सरकारी कर्मचारी,नेता,मंत्री और समारोहों में बोलने वाले खास लोग ऐसा आचरण करें जिस से बच्चा बच्चा उनसे प्रेरणा ले सके। आज हम केवल दो चार दिन में लेख लिख कर,देशप्रेम वाले फिल्मी गाने सुनकर,सुनाकर ये सोच लें कि हमारे देश में देशप्रेम का समुद्र बह रहा है तो ये हमारी गलतफहमी है। भला हो पाकिस्तान का जो इसको तोड़ता रहता है। थोड़ा लिखा घणा समझना।

Saturday, January 24, 2009

नेशनल इकोनोमिक कांफ्रेंस

श्रीगंगानगर के एमडी कॉलेज में नेशनल इकोनोमिक कांफ्रेंस का आयोजन हुआ। इस कांफ्रेंस में पंजाब,हरियाणा,दिल्ली,नॉएडा,बिहार,राजस्थान के ११८ डेलीगेट्स ने भाग लिया। इस आयोजन में कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ आर एस पूनिया,डॉ ओ पी गुप्ता,डॉ के बी शर्मा,श्रीमती पार्वती सोनी, और जयंत मल्होत्रा का बहुत अधिक योगदान रहा। भारत पाक सीमा पर बसे श्रीगंगानगर में इस प्रकार के आयोजन की शुरुआत एक बहुत अच्छा संकेत है।




Wednesday, January 21, 2009

बस यहीं तक है कहानी

----- चुटकी-----

एक थे
पीएम इन वेटिंग
श्री आडवानी,
...........
...........
.........
इस से आगे
नही बढ़ रही
उनकी कहानी।

Tuesday, January 20, 2009

आडवानी हो गए तंग


---- चुटकी-----
आडवानी जी
हो गए
थोड़ा और तंग,
क्योंकि
संघ खड़ा है
मोदी के संग।
---गोविन्द गोयल,श्रीगंगानगर

Monday, January 19, 2009

करप्शन करप्शन हाय करप्शन

देश के पूर्व वाइस प्रेजिडेंट भैरों सिंह शेखावत ने आज श्रीगंगानगर में प्रेस से बात करते हुए करप्शन,करप्शन हाय करप्शन की रट लगाये रखी। उन्होंने कहा--करप्शन से गरीबी,बेकारी ओर अराजकता बढेगी। करप्शन सबसे सबसे बड़ा विषय है हिन्दुस्तान में। पत्रकारों करप्शन करने वालों को बख्शो मत,जनता आन्दोलन करे, जेल जाए, गिरफ्तारी दे। राजस्थान की सरकार केस दर्ज करे। पाँच साल में करप्शन के रिकॉर्ड टूटे। [ वसुंधरा राजे के राज में] परन्तु राजवी [ श्री शेखावत के दामाद और वसुंधरा सरकार में मंत्री] पर आरोप नहीं है। वे ऐसे हैं भी नही। मेरे राज में करप्शन नहीं था। मुझ पर भी कोई आरोप नहीं है। राजनीति में आने से पहले पुलिस में था और खेती करता था। राजनीति की बात की लेकिन अधिक नहीं। बाद में "नारदमुनि" ने उनके दामाद नरपत सिंह राजवी से बात की। श्री राजवी ने उनकी बात का समर्थन किया। श्री शेखावत, श्री राजवी श्रीगंगानगर के निकट एक गाँव में पूर्व मंत्री गुरजंट सिंह बराड़ के यहाँ एक समारोह में शामिल होने के लिए आए थे। लोगो ने उनको खूब मालाएं पहनाई।

कमजोर निकले कलेक्टर ठाकुर


श्रीगंगानगर--यहाँ आते ही जिस प्रकार से राजीव सिंह ठाकुर ने चुस्ती फुर्ती दिखाई उस से ये आभास हुआ कि वे दूर दृष्टी पक्का इरादा और कड़े अनुशासन वाले जिला कलेक्टर साबित होंगें। मगर अब इस में संदेह होने लगा है। संदेह की वजह है उन डेरा प्रेमियों के खिलाफ मुकदमा जिन्होंने उनके घर के सामने धरना दिया था। डेरा प्रेमियों पर रास्ता रोकने और ध्वनी प्रदूषण फैलाने का आरोप है। कलेक्टर जी,आपकी नजर में वे दोषी हैं इस में कोई शक नहीं है। आप ने कोतवाल कि ओर से मुकदमा भी करवा दिया लेकिन घर ओर ऑफिस से बहार निकल कर जरा जिले का राउंड लगाओ तब आपको पता लगेगा कि किस किस ने कहाँ कहाँ रास्ता रोक कर आवागमन बाधित कर रखा है। सड़क के किनारे, नहरों की पटरी पर,कलेक्ट्रेट की दिवार के आसपास जहाँ तक निगाह जायेगी आपको कब्जे ही दिखेंगें। डेरा प्रेमियों ने तो अपना विरोध जताने के लिए कुछ घंटे के लिए ऐसा किया मगर हजारों लोग तो सरकारी जमीन पर स्थाई कब्जा किए बैठे हैं।
चलो इनकी तरफ़ नजर मत डालो, तो ये पक्का इरादा कर लेने कि आइन्दा जो भी सड़क आम पर रास्ता रोक कर धरना प्रदर्शन करेगा उसके खिलाफ ऐसा ही मुकदमा किया जाएगा वह भी प्रशासन की ओर से।क्योंकि आम आदमी में इतनी ताकत नहीं कि वह ऐसा कर सके। एक बात और आप अभी आए हो, यहाँ तो हर सप्ताह कई कई बार विभिन्न संगठन इसी प्रकार से धरना प्रदर्शन करेंगें। अगर ऐसे ही मुकदमे दर्ज होते रहे तो जाँच अधिकारी कम रह जायेंगें। शनिवार को डेरा प्रेमी आपके घर तक आ गए अगर आप तुरंत अपनी "प्रजा" से दुखदर्द पूछकर बाहर आकर उनका ज्ञापन ले लेते तो आपकी शान नहीं घटने वाली थी। तब ५ मिनट में सब के सब अपने अपने घर चले जाते, मगर आप बाहर क्यूँ आते आप तो कलेक्टर हो!
कलेक्टर साहेब आप जब तक यहाँ रहें ऐसा ही करना। मन की बात कहूँ, कलक्टरी करना अलग बात है और कलक्टरी करते हुए लोगों का दिल जीतना एक अलग बात। केवल कलक्टरी करने वालों को लोग भूल जाते हैं। इस इलाके के दिल का मिजाज बहुत ही अलग प्रकार का है। जी में आया तो आप पर सब कुछ निछावर कर देंगें और जच्च गई तो पानी भी नहीं पिलायेंगें। निर्णय आप को करना है कि कैसी कलक्टरी करनी है।

Saturday, January 17, 2009

कलेक्टर निवास सामने डेरा प्रेमियों का डेरा

श्रीगंगानगर में अवकाश के दिन किसी अधिकारी ने सोचा भी नहीं होगा कि ठण्ड में उनको एक नई परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन तो सच्चा सौदा के मुखी संत गुरमीत राम रहीम सिंह को जिले से सकुशल वापिस भेज चैन की बंसी बजा रहा था। अचानक दिन में डेरा प्रेमियों ने जिला कलेक्टर राजीव सिंह ठाकुर के निवास के सामने डेरा जमा लिया। डेरा मुखी १५ जनवरी को अपने गाँव आए थे। कल रात को उनको वापिस भेज दिया गया। डेरा के प्रवक्ता ने कहा कि उनको पाँच मिनट में ना जाने पर पर्चा दर्ज कर लेने की धमकी दी गई। जबकि पहले उनको रहने की अनुमति देने का भरोसा दिलाया गया था। जिला कलेक्टर ने इस बात से इंकार किया है। बाद में डेरा प्रेमी सी एम के नाम एक ज्ञापन देकर लौट गए। श्रीगंगानगर में १५ मई २००७ को डेरा प्रेमियों और सिख समाज के लोगों के बीच हिंसक टकराव हो गया था। उसके बाद से प्रशासन से डेरा प्रेमियों और उनके गुरु पर अंकुश लगा रखा है। सिख समाज के कुछ लोग प्रशासन को आँख दिखाकर यह सब करने को मजबूर करते रहते है। हाल ये है कि डेरा प्रेमियों को अपने घरों में भी सत्संग करने के लिए सौ बार सोचना पड़ता है। प्रशासन बेवजह चन्द सिख व्यक्तियों को सिख समाज का लीडर मान रहा है। जबकि सालों से डेरा मुखी का सत्संग श्रीगंगानगर जिले में होता आ रहा है। आज पहली बार डेरा प्रेमियों ने प्रशासन पर अपना उसी तरीके से बवाब बनाया है जैसे दूसरा पक्ष करता है।

घर बैठे गंगा आई

---- चुटकी----

खुश है
मुन्ना भाई,
घर बैठे
गंगा आई।

Friday, January 16, 2009

कब भरेगा पाप का घड़ा


---- चुटकी----

पाक
जिद पर अड़ा,
भारत
नरम पड़ा,
आवाम
बेबस खड़ा,
कब भरेगा
पाप का घड़ा।

Thursday, January 15, 2009

श्री कमल नागपाल को श्रद्धांजली

लोकल अखबार की भी अपनी आन बान शान होती है यह श्री कमल नागपाल से पहले शायद ही कोई सोच पाया। हो सकता है ये लाइन कई लोगों के हजम ही ना हो कि लोकल अखबार जन जन में लोकप्रिय बनाने की शुरुआत उन्होंने ही की। ना जाने कितने ही पत्रकार उन्होंने अपने सानिध्य में निखारे। सम्भव है बड़े बड़े अखबारों में नौकरी करने वाले ये पत्रकार किसी के सामने इस बात को ना स्वीकारें लेकिन मन ही मन में वे जरुर कमल जी को थैंक्स कहतें ही होंगें। बेशक उन्होंने मुझे हाथ पकड़ कर पत्रकारिता के सबक नहीं सिखाये मगर मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं कि मैंने उनके संस्थान में काम करते करते जीतनी मेरे में बुद्धि और शक्ति थी लेखन में सुधार जरुर किया। कम से कम शब्दों में शानदार,जानदार पठनीय ख़बर लिखने में वे मास्टर थे। श्री नागपाल कम्प्लीट पत्रकार ही नहीं एक जिंदादिल,हरफन मौला इंसान थे। इस पोस्ट के साथ जो विडियो है वह ३१ दिसम्बर २००६ का है। तब वे ऐसी बीमारी से जिंदगी की आखिरी लडाई लड़ रहे थे जिसका कोई नाम तक लेना नहीं चाहता। श्री कमल जी लड़े तो बहुत परन्तु जीत उस मौत की ही हुई जो जगत में एक मात्र सत्य है। एक साल पहले १५ जनवरी २००८ को उनका निधन हो गया। यह पोस्ट उनको विनम्र नमन करने का प्रयास है।

टीवी पत्रकारों ने किया विरोध



श्रीगंगानगर में आज टीवी न्यूज़ चैनल्स से जुड़े पत्रकारों ने प्रस्तावित"काले कानून" के विरोध में काली पट्टियां बांधी। काली पट्टी बांधे पत्रकार जिला कलेक्टर ऑफिस पहुंचे। वहां उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम लिखा एक ज्ञापन जिला कलेक्टर राजीव सिंह ठाकुर को दिया। ज्ञापन में पत्रकारों ने प्रधानमंत्री से कोई ऐसा कानून ना लागु करने का आग्रह किया है जिस से न्यूज़ चैनल की अभिवयक्ति की आजादी ख़तम हो जाए। ज्ञापन जी न्यूज़ के गोविन्द गोयल,एनडीटीवी के राजेश अग्रवाल,ईटीवी के राकेश मितवा,डीडी के आत्मा राम,एमएच १ की मिस स्वाति अग्रवाल तथा पंजाब के टाइम टीवी के पत्रकार सुनील सिडाना ने कलेक्टर को दिया। जिला कलेक्टर ने ज्ञापन पीएमओ भिजवाने के आश्वाशन दिया। पत्रकारों ने आज दिन भर काली पट्टी लगाकर अपना काम काज किया।

बाकी आल बकवास

---- चुटकी----

अम्बानी,टाटा,मित्तल को
नजर आई
नरेंद्र मोदी में आस,
मतलब
बाकी आल बकवास।

Wednesday, January 14, 2009

की मास्टर सत्यम का

Raju Raju sat on the wall

Raju Raju had a great fall

Balance sheet died

Shareholders cried

Raju Raju made a fraud

----

Raju Raju Yes baba

Cheating us No baba

Telling Lies No baba

Open the balance sheet

HA HA हा








यह सब कुछ मेरे दोस्त नरेंद्र शर्मा ने मुझे मेल किया। जो मैंने यहाँ पोस्ट कर दिया।

ख़ुद पर तो बस चलता नहीं




हमारी कहो या आपकी, यह सरकार भी खूब है। इसका अपने "गुरूजी" जैसे लोगों पर तो बस चलता नहीं। इस कमजोरी को छिपाने के लिए वह उस पर अंकुश लगा रही है जो "गुरूजी" जैसों को पाठ पढ़ा सकती है। भाई जब आप कुछ ग़लत ही नहीं कर रहे तो फ़िर किस बात का डर है। यह भी सही है कि घर से लेकर देश तक को बेहतर तरीके से चलाने,उसको खुशहाल रखनेके लिए कुछ नियम कायदे बनाने और अपनाने पड़ते हैं। परन्तु ऐसा नही हो कि इसकी आड़ में मुखिया ऐसे नियम कायदे लागु कर दे जिस से घर समाज देश में किसी मेंबर को अपना रोजमर्रा का कामकाज करना ही मुश्किल हो जाए,या वह वो सब ना कर सके जो उसका धर्म या कर्तव्य है। ऐसा ही अब सरकार करने में लगी है। ऐसी कोशिश पहले भी होती रहीं हैं। ग़लत का विरोध होना ही चाहिए चाहे वह कोई भी कर रहा हो। आज मीडिया सरकार के कदमों का विरोध कर रहा है। क्योंकि उसके साथ ग़लत ग़लत हो रहा है। अगर सरकार का अंकुश उसके ऊपर रहा तो मीडिया वह नहीं कर सकेगा जो समाज और देश हित में उसको करना होता है।

Tuesday, January 13, 2009

अपनी अपनी ढफली

---- चुटकी-----

पाक में सबकी
अपनी अपनी ढफली
अपना अपना राग,
कोई सुना रहा बन्नी
कोई गा रहा फाग।

Sunday, January 11, 2009

क्या मंदा है श्रीमान

---- चुटकी-----

मंदा मंदा मंदा
क्या मंदा है श्रीमान,
जिसके बिना
ना काम चले
वह महंगा सब सामान,
रोटी महँगी
कपड़ा महंगा
महंगा है मकान,
मंदा मंदा मंदा
क्या मंदा है श्रीमान।

Saturday, January 10, 2009

एस पी,डीएसपी आपका जवाब नहीं

श्रीगंगानगर के मुख्य बाज़ार में एक दुकानदार को ५-६ जने पीट गए। दुकानदार के चेहरे पर चोट लगी। वह अपने भाई- बंधू के साथ थाना गया। वहां ३ घंटे के बाद मुकदमा दर्ज हुआ। इसी दौरान वह भी आ गया जिसका नाम रिपोर्ट में था। मुक़दमा आईपीसी की धारा ३२३,३४१,४५२,३८२ में दर्ज हुआ। मगर पुलिस ने उस आरोपी से बजाये कुछ पूछने के उसको जाने दिया। घटना को २४ घंटे से भी अधिक का समय हो गया। तब से लेकर अब तक श्रीगंगानगर के पुलिस अधीक्षक श्री आलोक विशिस्ट, सी ओ सिटी भोला राम जी के सेल फ़ोन पर लगातार बात करने की कोशिश की मगर सफलता नहीं मिली। दोनों अधिकारियों के फ़ोन नम्बर पर एक से अधिक बार अलग अलग समय कॉल की गई लेकिन एसपी और सीओ ने फ़ोन नहीं उठाया। इस दौरान ऐसी कोई घटना भी नहीं हुई कि ये मान लिया जाए कि वे सब उसमे व्यस्त थे।
श्रीगंगानगर जिला पाकिस्तान से लगा हुआ है। इसके तीन तरफ़ छावनियां हैं। श्रीगंगानगर जिला हर लिहाज से बहुत ही संवेदनशील है। ऐसे स्थान पर नियुक्त एसपी अपना फ़ोन अटेंड ही ना करे तो इस से अधिक संवेदनहीनता और क्या हो सकती है। पता नहीं कौन क्या सूचना एसपी को देना चाहता हो! हो सकता है कोई बहुत अधिक पीड़ित आदमी एसपी की मदद चाहता हो!सम्भव है कोई संभावित बड़े अपराध के बारे कोई सुचना देना चाहता हो!मगर इन सब बातों से इन अधिकारियों को क्या? ये तो सरकार के नौकर हैं,जनता के प्रति इनकी जवाबदेही थी ही कब? अगर कोई अधिकारी,बड़ा नेता इस को पढ़े तो इस पर कुछ ना कुछ करे जरुर ताकि अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी का अहसास तो हो सके।
एक ओर एस पी हैं जो अपना फोन अटेंड ही नहीं करते दूसरी ओर नए आए जिला कलेक्टर हैं जिन्होंने पहले दिन ही अपना फोन नम्बर इस वक्तव्य के साथ सार्वजनिक कर दिया कि कोई भी उनसे संपर्क कर अपनी बात कह सकता है।

Friday, January 9, 2009

सरकार बजा रही है खड़ताल

---- चुटकी----

यहाँ से वहां तक
हड़ताल ही हड़ताल,
देश की सरकार
बजा रही है खड़ताल,
कौन और क्यूँ
करवा रहा है
यह सब, कोई तो
करे इसकी पड़ताल।

अब भी बाकी है चाहत जी

---- चुटकी----

शिबू सोरेन से कुछ
सीख लो शेखावत जी,
क्यों करते हो
बुढापे में अदावत जी,
वाइस प्रेजिडेंट रह चुके
अफ़सोस, अब भी बाकी है
आप में कोई चाहत जी।
---
यह चुटकी भैरों सिंह शेखावत के चुनाव लड़ने के ऐलान पर है। श्री शेखावत देश के वाइस प्रेजिडेंट रह चुके,प्रेजिडेंट का चुनाव हार चुके, अब भी उनमे अगर कोई राजनीतिक पद पाने की लालसा है तो ये अफ़सोस करने लायक ही है। आख़िर किसी पद की कोई मर्यादा तो होती होगी। वे कहतें हैं भ्रस्टाचार के खिलाफ जनजागरण,गाँव गरीब का कल्याण और राजनीति का शुद्धिकरण उनका मिशन होगा। अच्छी बात है। लेकिन इस के लिए कोई पद होना क्या जरुरी है। महात्मा गाँधी के पास कोई पद नही था। इसके बावजूद वे लीडर थे। फ़िर आप तो ६० साल से राजनीति में हैं। यह सब पहले क्यों नही किया जो अब आप कह रहे हो। श्रीमान जी आप देख रहें हैं ना जनता ने शिबू सेरोन की क्या हालत की है। हर पल एक सा नहीं होता। आप ने तो सब कुछ भोग लिया अब क्या रह गया जो आपकी नजर से बच गया।

Thursday, January 8, 2009

सत्यम भी झूठा है

--- चुटकी----

ओह ! गोड
आपका तो हर
काम अनूठा है,
कलयुग में
तो सत्यम
भी बड़ा झूठा है।

Wednesday, January 7, 2009

इजराईल को गुरु बनाओ

--- चुटकी----

ना पाक को सबूत दो
ना किसी अमेरिका
को समझाओ,
आप तो बस
तुंरत इजराईल को
अपना गुरु बनाओ।

Tuesday, January 6, 2009

जैसे खो गया सब कुछ उनका


सूनी आँखें बता रही हैं
जैसे खो गया अपना कुछ उनका
मगर जब ढूंढा उन्होंने
तब एक निशान तक ना पाया
कुछ कहने को ओंठ खुले ही थे
उनका छोटा सा दिल भर आया
उनको गए हो गई एक मुद्दत
उनका एक ख़त भी ना आया
और कितना इंतजार करवाओगे
तुम्हारे इंतजार में
दिन रात का चैन गंवाया
चाँद सूरज आतें हैं
आकर चले जाते हैं
तुम्हारी यादों का झोका
आके जाने ना पाया।

Sunday, January 4, 2009

वाह ! ताज, आह ! ताज

दुनिया में ताजमहल अपने आप के एक ऐसा अजूबा है कि इंसान हर सम्भव उसको देखने,छूने,उसके आस पास फोटो खिंचवानेको लालायित रहता है। हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही था। मथुरा गए तो आगरा जाने से अपने आप को नहीं रोक सके। २८ दिसम्बर संडे का दिन। दोपहर १२-३० बजे लाइन में लगे। लाइन इतनी लम्बी की क्या कहने। ३-३० बजे जब प्रवेश द्वार के निकट आए तो सुरक्षा कर्मियों ने बताया कि लेडिज जेंट्स अलग अलग लाइन में लगेंगें। अब हो भी क्या सकता था। जेंट्स अन्दर चले गए,लेडिज फ़िर से लाइन में। ये सुरक्षा कर्मी पहले ही बता देते तो बाहर से परिवार सहित आने वालों को परेशानी तो नहीं होती।प्रवेश द्वार पर इस से भी बुरा हाल। जेंट्स की तलाशी लेने वाले सुरक्षा कर्मी तो ठीक व्यवहार कर रहे थे। लेडिज सुरक्षा कर्मी तो चिडचिडी हो चुकी थी, पता नहीं घर की कोई परेशानी थी या भीड़ के कारन उनका ये हाल था। तलाशी के समय एक लेडिज के आई कार्ड उसने फेंक दिए। लेडिज ने काफी तकरार की। एक अन्य लड़की के पर्स में ताश थी वह उस सुरक्षा कर्मी ने कूडेदान में डाल दी। उसका व्यवहार सबके लिए परेशानी का सबब बना हुआ था मगर प्रदेश में बोले कौन लेकिन ताज के निकट जाते ही केवल वाह ! वाह ! के अलावा कुछ मुहं से निकल ही नही सकता था। उस ज़माने में जब निर्माण के लिए कोई आधुनिक मशीनरी नहीं होती थी तब ताज का निर्माण हुआ। यमुना नदी के किनारे ताज प्रेम,पति-पत्नी के अनूठे,अनमोल तथा गरिमामय संबंधों का साक्षी बनकर अटल,अविचल खड़ा हुआ है। साधुवाद उनको जिन्होंने इसकी कल्पना कर उसको अमली जामा पहनाया। साधुवाद उनको जो आज अपनी इस विरासत को बनाये रखने के लिए जी जान से लगे हुए हैं। साधुवाद उनको भी जो घंटों लाइन में लगे रहते हैं केवल इसलिए ताकि उनको भी ताज को जी भरकर देख लेने,उसको छू लेने का अवसर मिल सके। घंटों की प्रतीक्षा और सुरक्षा कर्मियों का कभी कभार होने वाला रुखा व्यवहार भी उनको ताज देखने से रोक नहीं पाता। वाह ! वाह! ताज।

गले बैठ गए आप के


मनमोहन,चिदंबरम
मुखर्जी, धमकाते
ललकारते
गले बैठ गए आप के,
कोई असर नही हुआ
अभी तक उस
बेशर्म पाक के।

Saturday, January 3, 2009

सबूत दे दे भारत थक गया


सबूत दे दे भारत थक गया
अमेरिका भी गया हार,
बातों से नहीं मानेगा ये
इसके जूते मारो चार।
ये है आदत से लाचार
प्यारे, आदत से लाचार।
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संसद में घुस गए आतंकी
मुंबई को दहलाते हैं,
नेता हमारे सारे कायर
बस खाली गाल बजाते हैं,
जनता है लाचार,प्यारे
जनता है लाचार।
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"बहादुर" सारे आतंकी
घर में आकर मारते हैं,
गाँधी हमारे पथ प्रदर्शक
हम दूर से ही ललकारतें हैं,
कैसी ये सरकार प्यारे
कैसी ये सरकार।
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कब तक होता जुल्म रहेगा
कोई तो समझाओ जी,
रोज रोज का मरना कैसा
एक बार मर जाओ जी,
जीना है बेकार प्यारे
जीना है बेकार।

Thursday, January 1, 2009

एक और कलेंडर बदल दिया

नया साल क्या है? एक कलेंडर का बदलना ! इस के अलावा और क्या बदला? कुछ भी तो नहीं। वही पल हर पल है। हम और आप भी वही हैं उसी सोच के साथ। हमारे तुम्हारे सम्बन्ध भी वैसे ही रहेंगें जैसे रहते आए हैं। हमने एक कलेंडर के अलावा कुछ भी बदलने की कोशिश ही नहीं की। बस कलेंडर बदला और अपनों को दी नए साल की शुभकामनायें, उसके बाद बस वैसा ही सब कुछ जैसा एक दिन पहले था। इस प्रकार से ना जाने कितने ही साल आते गए जाते गए,परन्तु हम वहीँ हैं। केवल एक कलेंडर या गिनती बदलने से कोई नया पन नही आता। नया तो हमारे दिल और दिमाग में होना चाहिए। उसके बाद तो हर पल नया ही नया है। हर नए दिन की सुबह नई है शाम नई है।बाग़ के किसी फूल को देखोगे तो वह भी हर पल नया ही लगेगा। सुबह को नए अंदाज में निहारोगे तो वह कल से नई नजर आएगी। मगर अफ़सोस तो इस बात का है कि हम केवल कलेंडर बदल कर ही नया साल मानतें हैं। जबकि हम चाहें तो हमारा हर पल,हर क्षण नया ही नया हो सकता है। बस थोडी सोच नई करनी होगी। हर पल का यह सोचकर आनंद लेना होगा कि यह फ़िर कभी नहीं आने वाला। क्योंकि हर पल नया जो होगा। फ़िर एक दिन के बदलने की बजाय हम लोग हर पल बदलने की मस्ती अपने अन्दर अहसास कर सकेंगें। तो फ़िर देरी किस बात की है,३६५ दिन इंतजार क्यों करें,हर पल नया साल अपने अन्दर महसूस करें और सभी को कराएँ। एक बार करके तो देखें वरना ३६५ दिनों बाद कलेंडर तो बदलना ही है। आप सभी मुस्कुराते रहो,यही कामना है।

मैं कौन हूँ,क्या हूँ?


आज से एक और
नया साल शुरू हो गया,
लोग अपनों से मिलकर
खुशियों का इजहार करेंगें,
नए साल की मंगल
भावना के साथ
एक दुसरे के गले मिलेंगें,
मगर मैं अकेला
वर्तमान के बंद
कमरे में बैठा
आने वाले सुनहरे
भविष्य को भुलाकर
अपने भूतकाल के
बारे में सोच रहा हूँ,
जिसने मुझे हर पल हर क्षण
एक नए अनुभव से
परिचित करवाया था,
मगर अफ़सोस वह
आज तक मुझसे
मेरा परिचय नही करवा सका,
यही वजह है कि
मैं हर नए साल को
अपने आप से
दूर होता चला गया
आज स्थिति ये है कि
मैं ख़ुद नहीं जानता
मैं कौन हूँ, क्या हूँ।