Sunday, April 5, 2009
धर्मराज का दरबार
धर्मराज के संतुष्ट होने के बाद नारदमुनि को बताया गया कि उनको इस प्रकार से क्यों लाया गया था। उन पर अपनी मौत की झूठी ख़बर लिखने का आरोप है। धर्मराज ने कहा- अगर नारदमुनि ऐसा करेगा तो फ़िर विश्वास किस पर किया जाएगा। नारदमुनि को अपनी बात कहने का अवसर दिया गया। नारदमुनि बोले-- महाराज जिस लोक में मैं आजकल रहता हूँ वहां बच्चे से लेकर बूढे तक के चेहरे से मुस्कान गायब हो चुकी है। हँसी ठट्ठा भी संता बंता के नाम से किया जाता है। लोग किसी कि खुशी में खुश नही होते। लोग एक दूसरे को जिन्दा ओर खुशहाल देखकर अन्दर ही अन्दर मरते रहते हैं। इस लिए मैंने अपनी मौत की बात की। वह भी पहली अप्रैल को।
आप मेरा ब्लॉग देख लो इसी झूठ पर कई जने मुस्कुराये। महाराज मैंने किसी ओर को हंसने-हँसाने का पात्र नहीं। इसके लिए मैंने अपने आप को प्रस्तुत किया। महाराज किसी ओर पर हंसना गुनाह हो सकता है अपने आप पर नहीं।
नारदमुनि की बात पर दरबार में काना फूसी शुरू हो गई। कुछ टिप्पणियां भी धीमे धीमे आने लगी। भारत की तरह न्यूज़ वालों को यहाँ कहीं भी आने की आजादी नही थी। इसलिए वे दरबार से बाहर अपनी अपनी तरह से इस ख़बर का प्रसारण कर रहे थे।
नारदमुनि ने अपनी बात ख़तम कर धर्मराज की ओर देखा। धर्मराज ने कुछ क्षण चित्रगुप्त से बात की। उसके बाद उन्होंने फैसला कल सुनाने की बात कह कर कार्यवाही समाप्त कर दी। उनके प्रवक्ता ने आकर मीडिया को यह जानकारी दी। उसके बाद भी टीवी वाले अपने अपने अनुमान फैसले के बारे में बताते और सुनाते रहे। जो तेज थे उन्होंने एक्सपर्ट अपने स्टूडियो में बुला लिए और बहस आरम्भ कर दी। बेले दर्शकों से राय मांगी जाने लगी। सारा दिन इसी में निकल गया।
Wednesday, April 1, 2009
नारदमुनि अब नहीं रहे
आप मुझे नहीं जानते। मैं नारदमुनि का दोस्त हूँ। उन्होंने खास तौर से मुझे ये जिम्मेदारी सौंपी थी। ताकि सभी को पता लग जाए कि नारदमुनि इस लोक की यात्रा पूरी करके चले गए।
आप कोई शोक संदेश देना चाहते हो तो ०९८४५०२२६६३ , ०९४१४२२०६६६ ,०९४१४५८०७८७,
आओ उनकी आत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।
Tuesday, March 31, 2009
खुशी में हुआ बावला
Monday, March 30, 2009
कुत्ता मरा तो खूब आए
एक बहुत बड़ा अफसर था। उसके पास जानदार शानदार कुत्ता था। अफसर का कुत्ता था तो उसकी चर्चा भी इलाके में थी। सब उसको नाम और सूरत से जानते भी थे। लो भाई एक दिन कुत्ता चल बसा। ओह! अफसर के यहाँ शोक प्रकट करने वालों की भीड़ लग गई। नामी गिरामी से लेकर आम आदमी तक आया। [आम आदमी तो तमाशा देखने आया.उसको अफसर के पास कौन जाने देता।] हर कोई कुत्ते की प्रशंसा करे। मीडिया भी पीछे नहीं रहा। ब्लैक बॉक्स में कुत्ते की फोटो लगा कर उसकी याद में कई लेख लिखे गए। अफसर के खास लोगों ने कुत्ते के बारे में संस्मरण प्रकाशित करवाए। शोक संदेश छपवाए। तीये की बैठक तक मीडिया से लेकर घर घर कुत्ते की ही चर्चा थी।
अफसर कुत्ते की मौत का गम सह नही सका। उसकी भी मौत हो गई। अब नजारा अलग था। कोई माई का लाल शोक प्रकट करने नही पहुँचा। जरुरत भी क्या थी। जिसको सूरत दिखानी थी वही नही रहा।
Saturday, March 28, 2009
वरुण गाँधी की टीआरपी बढ़ी
वरुण गाँधी ने क्या कहा? उसको क्या कहना चाहिए था और क्या नहीं? इस बारे में हमने कुछ नहीं कहना। लेकिन इसमे कोई दो राय नहीं हो सकती कि वरुण गाँधी फिलहाल टीआरपी में अन्य तमाम लीडर्स से आगे हैं।
Friday, March 27, 2009
घुसपैठिये आतंकवादी हैं
श्रीगंगानगर जिले से लगती भारत-पाक सीमा गत दिवस जो दो पाक घुसपैठिये बी एस एफ ने मारे थे वे आतंकवादी थे। बल के डीआईजी सी आर चौहान ने कहा दोनों ९९.९९% आतंकवादी ही थे। एक सप्ताह में बल ने दो पाक घुसपैठियों को मारा और एक को जिन्दा पकड़ लिया। अब सीमा सुरक्षा बल के बड़े अफसर मुश्किल में फंस गए हैं। उनसे यह पूछा जा रहा है कि घुसपैठियों को मारा क्यों,जिन्दा क्यों नहीं पकड़ा। बल के सूत्र बताते हैं बजाये पीठ थपथपाने के बहुत बड़े अफसर यहाँ के अफसरों से कई बार सवाल जवाब कर चुके हैं। श्री चौहान ने कहा कि पहले उनको चेतावनी दी गई, मगर वे रुके नहीं। उनके पास किसी प्रकार का कोई हथियार ना हो, इस आशंका के चलते बल के जवानों ने फायर किए। यहाँ यह सवाल है कि आख़िर उनको गिरफ्तार करके क्या होता! जेल में पड़े पड़े रोटियां तोड़ते,उनकी सुरक्षा के इंतजाम करने पड़ते,राजनीति होती अलग से। खैर राजनीति तो अब भी होने की बात सामने आई है। क्योंकि लोकसभा चुनाव में एक समुदाय के वोट पर कब्जा जो करना है। इसलिए अगर वो किसी कारण मारे जाते हैं तो धर्मनिरपेक्ष? पार्टियों को तो दुःख होता ही है। [ पोस्ट के साथ डीआईजी श्री चौहान का विडियो है। वह विडियो भी हमारे पास है जिसमे उन्होंने घुसपैठियों के आतंकवादी होने की बात कही है। इस विडियो में कुछ अलग बात है मगर महत्वपूर्ण। ]
Thursday, March 26, 2009
पाकिस्तानियों की घुसपैठ
पाकिस्तान ने गत दिवस मरे गए घुसपैठियों के शव लेने से भी इंकार कर दिया था। उसका कहना था कि मृतक पाक नागरिक नही है। उधर कुपवाड़ा जिले में सेना पाक आतंकवादियों से लड़ रही है। राजस्थान में पाक युवक दिन दिहाड़े भारत में आने की कोशिश करते हैं।
Wednesday, March 25, 2009
बुरे बनोगे, मजे करोगे
टीवी पर आने वाले विज्ञापन देख लो। अधिकांश नकारात्मक होतें हैं। जैसे--अरे देख लग रहा है क्या... । अब लग गया। हमें मीठे पानी की जरुरत नहीं अरविन्द की मम्मी को उसकी जरुरत है। फलां गोली से जुबान बंद रहती है, हाथ नहीं। और बाप लड़के के थप्पड़ मारता है। अपराध की ख़बर पहले पेज पर होती है किसी ने अच्छा काम किया हो तो उसको अन्दर के पेज पर डाल दिया जाता है। अपराधी की फोटो के लिए पत्रकार ख़ुद पुलिस की लल्लालोरी करते है। समाज में बढ़िया कुछ करने वालों को अपनी फोटो ख़ुद देकर आनी पड़ती है,वह भी डरते डरते।
वर्तमान का सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगें लोग। जिसको यह रोग लग गया। उसका कुछ नहीं हो सकता। " कुछ तो लोग कहेंगें लोगों का काम है कहना"....याद रखने वाले मजे में रहतें हैं।
Tuesday, March 24, 2009
श्रीगंगानगर में ओले पड़े
कविवर गोपाल दास नीरज ५ अप्रेल को श्रीगंगानगर आयेंगें। उनके सानिध्य में यहाँ कवि सम्मेलन होगा।
हिन्दुओं की बात करना गुनाह हुआ
जो हिंदू विरोधी
बात करेगा,
वही देश पर
राज करेगा।
Monday, March 23, 2009
जरा याद करो कुर्बानी

Sunday, March 22, 2009
बॉर्डर पर पाकिस्तानी मार गिराए
Saturday, March 21, 2009
कांग्रेस-बीजेपी करे प्रयोग,दूर होंगें कई सारे रोग
Thursday, March 19, 2009
चित्त भी मेरी,पट्ट भी. सिक्का मेरे बाप का
होना भी यही चाहिए। भगवान परिवार में कई मेंबर दे तो सब को अलग अलग पार्टी में एडजस्ट करवा देना चाहिए। सरकार अपने घर में ही रहेगी। सोनिया गाँधी-मेनका गाँधी को आदर्श के रूप में अपनाया जा सकता है। सिंधिया परिवार का उदाहरण दिया जा सकता है। चौटाला परिवार को देख आगे बढ़ सकते हो। नए लोग प्रिया दत्त-संजय दत्त से प्रेरणा ले सकते हैं। ऐसे प्रेरणादायी व्यक्तित्व पंचायत स्तर से लेकर सरकार तक होते हैं। संस्कार,विचार,जमीर,आत्मा,आस्था जैसे शब्द गरीब और कुचले हुए लोगों के लिए हैं। बड़े लोग इनको इस्तेमाल नही करते । वे तो हमेशा यही कहते हैं कि चित्त भी मेरी,पट्ट भी और सिक्का मेरे बाप का।
Wednesday, March 18, 2009
परिपक्व कौन? पाकिस्तानी या हिन्दुस्तानी
इसके विपरीत हिंदुस्तान में अगर ऐसा होता तो सबसे पहले सरकारी सम्पति की ऐसी की तैसी होती। सबसे बड़े लोकतंत्र वाहक रेल पटरियां उखाड़ देते, सरकारी भवन,सरकारी वाहनों को आग के हवाले कर दिया होता। जो उनके रास्ते में आता तहस नहस हो जाता। हिंदुस्तान में इस प्रकार से न जाने कितनी बार हो चुका है। हमारी तो फितरत है, " हारेंगें तो मारेंगें,जीतेंगें तो लूटेंगें"। पाकिस्तानियों ने ऐसा कुछ भी नहीं किया।
लोकतंत्र की डींग मारने वाले हिन्दुस्तानी अपने पड़ौसी से कुछ तो सीख ही सकते हैं। पाकिस्तान की जनता को सलाम करने में मेरे ख्याल से कोई बुराई नहीं है। चाहे पाकिस्तान में यह सब कुछ दिनों के लिए ही हो , किंतु जब अच्छा हुआ तब तो उसकी प्रशंसा कर ही देनी चाहिए।
Tuesday, March 17, 2009
गरीब की जोरू सबकी भाभी
अब दो दिन पहले की बात करें। पुलिस ने नगर के सभी साईबर कैफे के यहाँ जाकर रिकॉर्ड की जाँच की। उनको रिकॉर्ड किस प्रकार रखना है उसके बारे में निर्देश दिए। यह ख़बर पत्रिका ने नाम सहित छापी। बाकायदा साईबर कैफे के नाम लिखे गए जहाँ जहाँ पुलिस गई।
फर्क इतना ही है कि साईबर वालों का कोई माई बाप नहीं है, ना ही इनके पास अरबों रुपयों का कारोबार है। इसलिए इनके नाम छाप देने से कोई तूफान नहीं आने वाला था।
ख़बर में क्या लिखा जाएगा,किसका नाम होगा,नहीं होगा। यह उनकी पालिसी हो सकती है। लेकिन निष्पक्षता नहीं। चूँकि संपादक के पास सर्वाधिकार सुरक्षित हैं इसलिए उनको कुछ कहना सूरज को दीपक दिखाना है। किंतु एक पाठक यह प्रश्न तो कर ही सकता है कि क्या निष्पक्षता इसी को कहतें हैं? अगर कोई निष्पक्ष आदमी श्रीगंगानगर के सभी समाचार पत्रों में प्रकाशित उक्त कार्यवाही से सम्बंधित समाचार पढ़े तो वह जान जाएगा की ऐसी "निष्पक्षता"तो छोटे अख़बार भी नहीं दिखाते। जिनको हर रोज आर्थिक संकट से दो चार होना पड़ता होगा।
मैं जानता हूँ किसी बड़े पर टिप्पणी करने से मुझ पर संकट आ सकता है मगर जो हो रहा है उसके बारे में लाखों पाठकों को जानकारी तो होनी ही चाहिए।
Monday, March 16, 2009
सियासत की लाचारी
सियासत की
देखो लाचारी,
झुक गए
प्रेजिडेंट जरदारी।
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पाक में,किसने
किसके सामने
डाले हथियार,
ये अभी तो
पर्दे में है मेरे यार।
Sunday, March 15, 2009
पाक में कोहराम
पाक में कोहराम
भारत की हुई
नींद हराम
अमेरिका बैठा
सोच रहा है,
किसको सौन्पू
अब कमान .
वर्ल्ड में सुंदर हैं जो नाम






The most beautiful house in the worldÇSituated in Barcelona , Spain Owned by the famous footballer, Ronaldhino
The most beautiful city in the worldVancouver, Canada
TThe most beautiful girl in the worldHeld in France and her name is Fatima from Morrocco

The most beautiful eyes in the worldfrom Afghanistan ãÇÔÇÁ Çááå
The most beautiful eyes in the worldfrom Afghanistan ãÇÔÇÁ Çááå
The most beautiful bridge in the world
JAPAN

The most beautiful horse in the world
Arabian
The most beautiful plant in the world
It is shaped like a water bubble.. ÓÈÍÇä Çááå
ये सभी फोटो श्री सी एल वधवा जी ने मुझे मेल किए थे। इनमे संसार में सबसे सुंदर घर,वाटर फाल, लड़की,आँखें,घोड़ा,ब्रिज तथा सबसे सुंदर प्लांट का फोटो दिया गया है। धन्यवाद श्री वधवा जी का।
Saturday, March 14, 2009
डैड बॉडी का दान किया
Friday, March 13, 2009
लोकतंत्र हजम नहीं होता
हम समझ गए
पाक, तू पेट
पकड़ कर
क्यों रोता है,
असल में तेरे
लोकतंत्र
हजम नहीं होता है।
Thursday, March 12, 2009
थंक यू पुलिस
पुलिस के इस इंतजाम ने उस आलोचना को धो डाला जो नाके बंदी के कारण हुई थी। नाका बंदी क्या थी, बस ऐसे था जैसे नगर में कोई आतंकवादी घुस आयें हों। तब नगर के आम जन को भरी परेशानी और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था।
ज़िन्दगी के रूप में सजा पाई है
बेकसूर हूँ फ़िर भी सजा पाई है,
बेवफाई का इल्जाम नहीं कोई
चारों ओर फ़िर क्यों रुसवाई है।
जो चाहा वो मिला नहीं
भला करूँ तो कोई सिला नहीं
ये ज़िन्दगी है या
ज़िन्दगी के रूप में सजा पाई है।
Wednesday, March 11, 2009
तन मन हो जाए रंगीन

Tuesday, March 10, 2009
सृष्टी के आशीष बेटे के संग
चरणों में जैसे ही
अर्पित किया
आदर मान का रंग,
सृष्टी के आशीष
स्वतः हो गए
बेटे के संग।
प्यासी गौरी लग गई अंग
गया मलाल,
मन में उमड़ा
प्रीत का ज्वार
दोनों मिले
बाहें पसार।
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आया भरतार
ना लगाया रंग
प्यासी गौरी
लग गई अंग।
Monday, March 9, 2009
रंग छोड़ कर अंग लगा ले
मैं हो जाउंगी लाल रे,
मौका और दस्तूर भी है
तू बात ना मेरी टाल रे।
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इन रंगों को तू भी जाने
मिनटों में बह जायेंगें,
प्रीत का रंग है सबसे पक्का
रगड़ रगड़ थक जायेंगें।
सकुचा कर सिमट गई
झीने कपडों पर
साजन ने मारी
प्रेम भरी पिचकारी,
सकुचा कर
अपने आप में
सिमट गई सजनी
सारी की सारी ।
Sunday, March 8, 2009
छोड़ दो सारे लफड़े
---- चुटकी----
मांजो बरतन
धोओ कपड़े,
एक दूजे की
हेल्प करो
छोड़ कर
सारे लफड़े।
Friday, March 6, 2009
चील,कौव्वे और गिद्ध
लोकतंत्र में
बार बार
हर बार
यही हो रहा है सिद्ध,
खरगोश, मेमने
चुनाव जीतते ही
बन जाते हैं
चील,कौव्वे और गिद्ध,
चुनाव के समय
डरे,सहमे जो
खरगोश,मेमने
जन जन के सामने
मिमियाते हैं,
चुनाव जीतने के बाद
चील,कौव्वे,गिद्ध
में तब्दील हो
देश और जनता को
नोच नोच कर खाते हैं,
लोकतंत्र की
विडम्बना देखो,
यही चील,कौव्वे,गिद्ध
अपने इस रूप में
जनसेवक कहलाते हैं।
Wednesday, March 4, 2009
पाक ने किया खुलासा
पाक ने ख़ुद
ही कर दिया
सबूतों का खुलासा,
समझ सको तो
समझ लो
उसकी यह भाषा।
कुन्नर जी को मित्तल बंधुओं की बधाई
१--मित्तल जिनिंग एंड प्रेसिंग फैक्ट्री २--नीलकंठ इंडस्ट्रीज जैतसर हैड ऑफिस ५६ जी ब्लाक श्रीगंगानगर
२--होमलैंड सिटी प्रोजेक्ट १५ नैशनल हाई वे suratgadh road श्रीगंगानगर
मित्तल परिवार की कुन्नर को बधाई
Monday, March 2, 2009
कुन्नर को बधाइयों का ताँता
इनके व्यापारिक प्रतिष्ठान
१--कृष्णा एडिबल आयल मिल्स,रिको श्रीगंगानगर
२--कृष्णा ट्रेडर्स नई धानमंडी श्रीगंगानगर
३--जय श्रीराम ट्रेडिंग कम्पनी,श्रीगंगानगर
४--एस.एम.आर. लीजिंग एंड फाइनेंस लि० श्रीगंगानगर
५--शुभम कोमर्शियल कारपोरेशन नई धन मंडी श्रीगंगानगर
६--कृष्णा इंडस्ट्री पदमपुर
७--एस.एम.इंडस्ट्री रिको श्रीगंगानगर
८--गंगानगर कमोडिटी लिमिटेड श्रीगंगानगर
के समस्त संचालक और कर्मचारी आज गुरमीत सिंह कुन्नर को मंत्री बनने पर बधाई दे रहे हैं।
Saturday, February 28, 2009
जनता का विधायक कुन्नर अब मंत्री बना
किसी ने कहा अपशगुन किसी ने वरदान
Wednesday, February 25, 2009
लैला-मंजनू की आखिरी पनाहगाह
Tuesday, February 24, 2009
नफरत ना करना मेरी मां


Sunday, February 22, 2009
ये क्या है? भ्रम,चमत्कार,या अन्धविश्वास
Saturday, February 21, 2009
छुआछूत के मामले बढे हैं देश में
उन्होंने प्रेस से कहा कि वे १९८० में इंदिरा गाँधी के साथ इस इलाके में आए थे। तब मैं उनका ड्राईवर,चपरासी,सचिव सबकुछ था। तब मैंने इस इलाके को देखा। तब से मेरे मन में इस इलाके की नुमाइंदगी करने की इच्छा है। बूटा सिंह के अनुसार इस इलाके का उतना विकास नहीं हुआ जितना होना चाहिए। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद से छुआछूत के मामलों में बढोतरी हुई है। छुआछूत कई जगह तो साफ नजर आता है। उन्होंने कहा कि आज तक इस कानून में किसी को भी सजा नहीं हुई है। चेयरमेन ने बताया कि कमीशन अपनी रिपोर्ट जल्दी ही सरकार को देगा।
बूटा सिंह के अनुसार राजस्थान के विधायक किरोडी लाल मीणा और पूर्व केन्द्रिय होम मिनिस्टर शिवराज पाटिल ने भी उनसे अपने इलाके से चुनाव लड़ने का ऑफर दिया है। लेकिन मैं श्रीगंगानगर से चुना लड़ना चाहता हूँ। बूटा सिंह ने राजस्थान के जालौर लोकसभा क्षेत्र का संसद में प्रतिनिधित्व किया है। जालौर अब सामने सीट हो गई जबकि श्रीगंगानगर एस सी के लिए रिजर्व है।
Friday, February 20, 2009
शाप दे दिया दादा ने
सोम दा ने
दे दिया
सांसदों को शाप,
सदन में करते हो
हंगामा, इसलिए
हार जाएं आप।
विचार नही स्टार चाहिए
विचार नहीं,खेल
फ़िल्म और टीवी के
बड़े स्टार चाहिए,
सांसद बनना है तो
आप भी हमारे
झंडे के नीचे आइये।
Thursday, February 19, 2009
गीतकार नीरज ने किया विमोचन
राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी राजेन्द्र कुमार मीणा के प्रथम काव्य संग्रह आबशार-ऐ-अश्क का विमोचन प्रख्यात गीतकार,कवि डॉ० गोपाल दास नीरज ने अलीगढ में किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि इस पुस्तक की सुगंध राजस्थान में ही नहीं पूरे देश में फैलेगी। श्री नीरज ने कहा कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में आज पतन का दौर चल रहा है। राजनीति और साहित्य दोनों भ्रमित हैं। आज पैसा ही सब कुछ हो गया है। श्री मीणा ने कहा कि श्री नीरज जी के आशीर्वाद से ही मेरी कल्पनाएँ पुस्तक के रूप में आ सकीं हैं। अलीगढ में कवि सम्मलेन भी हुआ। [विडियो में पुस्तक का विमोचन करते हुए श्री नीरज,कवि सम्मलेन में कविता पाठ करते हुए श्री नीरज जी, श्री मीणा जी।]
श्री नीरज जी शब्दों में"श्री राजेन्द्र कुमार मीणा 'राजेन्द्र' की कुछ कवितायें मैंने सुनीं। श्री राजेन्द्र एक प्रशासनिक अधिकारी हैं। आश्चर्य की बात है कि अपनी प्रशासनिक सेवा में अति व्यस्त रहते हुए भी सौन्दर्य और प्रेम की तथा प्रेम पीड़ा की जो कवितायें लिखी हैं वैसी मैंने पहले न तो कभी सुनीं और न कभी किसी पत्रिका में पढ़ी। वे सहज कवि हैं और ऐसा लगता है कि कवितायें उन्होंने नहीं बल्कि उनके भीतर बैठी हुई गहन अनुभूतियों के कारण स्वंय लिख-लिख गईं। वे मैथिल कोकिल विद्यापति के आधुनिक रूप में मुझे सदा ही प्रभावित करते रहेंगें और सदा याद आते रहेंगें। इस आधुनिक विद्यापति को मेरी हार्दिक शुभकामनायें।" यह सब श्री मीणा की पुस्तक में लिखा हुआ है।
आतंकवाद के दो नाम
पाकिस्तान
कहो या
तालिबान,
आतंकवाद हैं
दोनों नाम।
Wednesday, February 18, 2009
ये जो जिंदगी है
इनका जिक्र भी लाजिमी है
ट्रेन के शौचालयों में अश्लील वाक्य भी बहुत अधिक मात्र में लिखे हुए थे। लिखने वाले कितनी गन्दी मानसिकता के होंगें यह आसानी से समझा जा सकता है। लेकिन ट्रेन की सफाई के जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों को तो इनको साफ़ कर देना चाहिए।
Tuesday, February 17, 2009
Friday, February 13, 2009
वेलेंटाइन डे,दूसरों की बहिन बेटियों के साथ
Wednesday, February 11, 2009
चड्डी साड़ी में घमासान
वेलेंटाइन डे पर
चड्डी और साड़ी में
हो गया घमासान,
कोई जीते कोई हारे
दाव पर लगी है
नारी की शान।
उधार का आयातित प्रेम दिवस
पता नहीं यह आयातित प्रेम हमारे लड़के-लड़कियों को कहाँ लेकर जाएगा। एक दिन के प्रेम में शालीनता,गरिमा की तो उम्मीद ही नहीं की जा सकती। जबकि हिन्दुस्तानी प्रेम की तो नीवं ही गरिमा और शालीनता है। किसी ने कहा है--"ये कोई खेल नहीं है जिंदगी के जीने का, लगी है शर्त तो सिक्का उछल कर देखो"।
Tuesday, February 10, 2009
फाल्गुन में सावन की सी रिमझिम
जाते जाते नई शुरुआत
नए एसपी उमेश चन्द्र से भी इसी मूड में चर्चा हुई। उनसे पूछा गया कि क्या वे भी जिला कलेक्टर की तरह अपना मोबाइल फोन नम्बर जनता के लिए सार्वजानिक करना चाहेंगे? उन्होंने कहा कि वे पहले यहाँ के सिस्टम को समझ कर फ़िर इस बारे में कोई बात करेंगें। नए एसपी मूल रूप से चंडीगढ़ के रहने वालें हैं।
Monday, February 9, 2009
भिखारिन के जज्बे को सलाम
पाक में जिन्ना,भारत में राम जी
पाक में जिन्ना
भारत में
श्रीराम जी,
आडवानी जी का
पता नहीं
कैसे बनेगा काम जी।
Sunday, February 8, 2009
पाक,तालिबान,जेहाद और कसाब
पाक,तालिबान,
जेहाद और कसाब,
इसके सिवा
न्यूज़ चैनलों में
और
क्या है जनाब।
Friday, February 6, 2009
मंदी में महंगा सामान
क्रिकेट खिलाड़ियों के
खूब लगे दाम,
इतनी मंदी में
इतना महंगा
मिला सामान।
--गोविन्द गोयल
धन्यवाद आपका और उनका

Thursday, February 5, 2009
मृत शरीर को दान किया
Wednesday, February 4, 2009
फाल्गुन कैसे गुजरेगा जो नहीं आए भरतार
सजनी करे विचार
फाल्गुन कैसे गुजरेगा
जो नहीं आए भरतार।
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फाल्गुन में मादक लगे
जो ठंडी चले बयार
बाट जोहती सजनी के
मन में उमड़े प्यार।
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साजन का मुख देख लूँ
तो ठंडा हो उन्माद,
"बरसों" हो गए मिले हुए
रह रह आवे याद।
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प्रेम का ऐसा बाण लगा
रिस रिस आवे घाव
साजन मेरे परदेसी
बिखर गए सब चाव।
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हार श्रंगार सब छूट गए
मन में रही ना उमंग
दिल पर लगती चोट है
बंद करो ये चंग।
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परदेसी बन भूल गया
सौतन हो गई माया
पता नहीं कब आयेंगें
जर जर हो गई काया।
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माया बिना ना काम चले
ना प्रीत बिना संसार
जी करता है उड़ जाऊँ
छोड़ के ये घर बार।
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बेदर्दी बालम बड़ा
चिठ्ठी ना कोई तार
एस एम एस भी नहीं आया
कैसे निभेगा प्यार।
Tuesday, February 3, 2009
पचास घंटे का अवरोध
Saturday, January 31, 2009
Friday, January 30, 2009
छोटी बात पर बड़ा लफड़ा
विधायक को
पांच लाख की
रिश्वत लेते पकड़ा,
उफ़! छोटी सी
बात और
इतना बड़ा लफड़ा।
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लोकायुक्त पुलिस ने कर्नाटक में भाजपा विधायक वाई सम्पंगी को पाँच लाख रूपये की रिश्वत लेते हुए बेंगलुरु स्थित एम एल ऐ क्वार्टर से पकड़ा गया। प्रदेश में विधायक के रिश्वत लेने का यह पहला मामला है। [ पकड़े जाने का पहला होगा।]
Thursday, January 29, 2009
सम्मान मिलने से पहले सम्मान
चुनावी लालीपॉप है भाई
डीजल,पेट्रोल,गैस
के दामों में कमी
तो चुनावी लालीपॉप
है मेरे भाई,
चुनाव के बाद
वसूल कर लेंगें
एक एक पाई।
Monday, January 26, 2009
पदमश्री सम्मान की गरिमा
"सुनहू भरत भावी प्रबल बिलख कहें मुनिराज,लाभ -हानि,जीवन -मरण ,यश -अपयश विधि हाथ" रामचरितमानस की ये पंक्तियाँ श्री एस एस महेश्वरी को समर्पित, जिनको पदमश्री सम्मान देने की घोषणा की गई है।यह मेरे लिए गर्व,सम्मान,गौरव... की बात है। क्योंकिं श्री महेश्वरी मेरे शहर के हैं। लेकिन दूसरी तरफ़ इस बात का अफ़सोस भी है कि क्या पदमश्री की गरिमा इतनी गिर गई की यह किसी को भी दिया जा सकता है। श्री महेश्वरी जी को यह सम्मान सामाजिक कार्यों के लिए दिया जाएगा। उनके सामाजिक कार्य क्या हैं ये सम्मान की घोषणा करने वाले नहीं जानते। अगर जानते तो श्री महेश्वरी को यह सम्मान देने की घोषणा हो ही नहीं सकती थी।
उन्होंने कुछ समाजसेवा भावी व्यक्तियों के साथ १९८८ में एक संस्था "विद्यार्थी शिक्षा सहयोग समिति"का गठन किया। समिति ने आर्थिक रूप से कमजोर उन बच्चों को शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता दी जो बहुत होशियार थे। यह सहायता जन सहयोग से जुटाई गई।इसमे श्री महेश्वरी जी का व्यक्तिगत योगदान कितना था? वैसे श्री महेश्वरी जी एक कॉलेज में लेक्चरार है और घर में पैसे लेकर कोचिंग देते हैं। श्रीगंगानगर में ऐसे कितने ही आदमी हैं जिन्होंने समाज में महेश्वरी जी से अधिक काम किया है। स्वामी ब्रह्मदेव जी को तो इस हिसाब से भारत रत्न मिलना तय ही है। उन्होंने ३० साल पहले श्रीगंगानगर में नेत्रहीन,गूंगे-बहरे बच्चों के लिए काम करना शुरू किया। आज तक उनके संरक्षण में कई सौ लड़के लड़कियां अपने पैरों पर खड़े होकर अपना घर बसा चुके हैं। जिनसे समाज तो क्या उनके घर वालों तक को कोई उम्मीद नहीं थी आज वे सब की आँख की तारे हैं। सम्मान की घोषणा करने वाले यहाँ आकर देखते तो उनकी आँखें खुली की खुली रह जाती। आज स्वामी जी के संरक्षण में नेत्रहीन,गूंगे-बहरे बच्चों की शिक्षा के लिए क्या किया जा रहा है वह शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। पता नहीं ऐसे लोग क्यूँ सम्मान देने वालों को नजर नहीं आते। आज नगर के अधिकांश लोगों को श्री महेश्वरी के चयन पर अचम्भा हो रहा है। अगर श्री महेश्वरी को इस सम्मान का हक़दार मन जा रहा है तो फ़िर ऐसे व्यक्तियों की तो कोई कमी नही है।
यहाँ बात श्री महेश्वरी जी के विरोध की नहीं पदमश्री की गरिमा की है। सम्मान उसकी गरिमा के अनुकूल तो होना ही चाहिए ताकि दोनों की प्रतिष्ठा में और बढोतरी हो, लेकिन यहाँ गड़बड़ हो गई। सम्मान की प्रतिष्ठा कम हो गई, जिसको दिया जाने वाला है उसकी बढ़ गई। मैं जानता हूँ कि जो कुछ यहाँ लिखा जा रहा है वह अधिकांश के मन की बात है किंतु सामने कोई नहीं आना चाहता। मेरी तो चाहना है कि अधिक से अधिक इस बात का विरोध हो और सरकार इस बात की जाँच कराये कि यह सब कैसे हुआ। मेरी बात ग़लत हो तो मैं सजा के लिए तैयार हूँ। यह बात उन लोगों तक पहुंचे जो यह तय करतें हैं कि पदमश्री किसको मिलेगा।
Sunday, January 25, 2009
देश प्रेम का मौसम आ गया
मेरे दिल में शहीद भगत सिंह की आत्मा ने प्रवेश कर लिया है। वह जय हिंद का नारा बुलंद कर रही है। जी करता है पाक में जाकर उसकी मुंडी मरोड़ कर किस्सा ख़तम कर दूँ। कमशब्दों में कहूँ तो मेरे अन्दर फिल्मी स्टाइल वाला देशप्रेम का जज्बा पैदा हो गया है। ना, ना, ना , ग़लत मत सोचो, मैं बिल्कुल ठीक हूँ। मुझे कोई दौरा नहीं पड़ा और ना ही मैंने कोई देशप्रेम से ओत प्रोत फ़िल्म देखी है। यह भाव तो आजकल अख़बार पढ़ कर आ गए। जिनमे इन दिनों इस प्रकार के लेख छप रहे हैं कि मेरे जैसे एक पाव वजन वाले इन्सान केमुहं से इन्कलाब जिंदाबाद के नारे बुलंद हो रहे हैं। चिंता की कोई बात नहीं,ये भाव स्थाई नहीं है। ये तो कल तक हवा हो जायेंगें। अगर दो चार दिन देशप्रेम के लेख से ऐसे भाव स्थाई रहते तो देश की ऐसी हालत तो नहीं होती। पहले गोरे थे, अब काले हैं,जन जन के हाल तो वही पुराने वाले हैं। देश में पहले चार मौसम हुआ करते थे,फिल्मो ने पांचवा मौसम प्यार का कर दिया और अब छठा मौसम देशप्रेम का हो जाता है २६ जनवरी और १५ अगस्त के आस पास। इस बीच पाकिस्तान हिम्मत कर दे तो ऐसा मौसम तब भी बन जाता है। इसको मजाक मत समझो यह गंभीर बात है। किसी में एक घटना से देश प्रेम पैदा हो जाए ऐसे बच्चे पैदा करने वाली कोख है क्या? देश प्रेम को मजाक के साथ साथ बाज़ार बना दिया गया है। बच्चों में देश के प्रति प्रेम,समर्पण तभी आएगा जब हम उनको हर रोज इस बारे में बतायेंगें। किसी ने कहा भी है--करत करत अभ्यास तो जड़ मति होत सूजान,रस्सी आवत जात तो सिल पर पड़त निशान। स्कूलों में इस प्रकार की व्यवस्था हो कि बच्चा बच्चा अपने देश और उसके प्रति उसके क्या कर्तव्य हैं,उसके बारे में जाने। उसके टीचर,सरकारी कर्मचारी,नेता,मंत्री और समारोहों में बोलने वाले खास लोग ऐसा आचरण करें जिस से बच्चा बच्चा उनसे प्रेरणा ले सके। आज हम केवल दो चार दिन में लेख लिख कर,देशप्रेम वाले फिल्मी गाने सुनकर,सुनाकर ये सोच लें कि हमारे देश में देशप्रेम का समुद्र बह रहा है तो ये हमारी गलतफहमी है। भला हो पाकिस्तान का जो इसको तोड़ता रहता है। थोड़ा लिखा घणा समझना।
Saturday, January 24, 2009
नेशनल इकोनोमिक कांफ्रेंस
Wednesday, January 21, 2009
बस यहीं तक है कहानी
एक थे
पीएम इन वेटिंग
श्री आडवानी,
...........
...........
.........
इस से आगे
नही बढ़ रही
उनकी कहानी।
Tuesday, January 20, 2009
आडवानी हो गए तंग

Monday, January 19, 2009
करप्शन करप्शन हाय करप्शन
देश के पूर्व वाइस प्रेजिडेंट भैरों सिंह शेखावत ने आज श्रीगंगानगर में प्रेस से बात करते हुए करप्शन,करप्शन हाय करप्शन की रट लगाये रखी। उन्होंने कहा--करप्शन से गरीबी,बेकारी ओर अराजकता बढेगी। करप्शन सबसे सबसे बड़ा विषय है हिन्दुस्तान में। पत्रकारों करप्शन करने वालों को बख्शो मत,जनता आन्दोलन करे, जेल जाए, गिरफ्तारी दे। राजस्थान की सरकार केस दर्ज करे। पाँच साल में करप्शन के रिकॉर्ड टूटे। [ वसुंधरा राजे के राज में] परन्तु राजवी [ श्री शेखावत के दामाद और वसुंधरा सरकार में मंत्री] पर आरोप नहीं है। वे ऐसे हैं भी नही। मेरे राज में करप्शन नहीं था। मुझ पर भी कोई आरोप नहीं है। राजनीति में आने से पहले पुलिस में था और खेती करता था। राजनीति की बात की लेकिन अधिक नहीं। बाद में "नारदमुनि" ने उनके दामाद नरपत सिंह राजवी से बात की। श्री राजवी ने उनकी बात का समर्थन किया। श्री शेखावत, श्री राजवी श्रीगंगानगर के निकट एक गाँव में पूर्व मंत्री गुरजंट सिंह बराड़ के यहाँ एक समारोह में शामिल होने के लिए आए थे। लोगो ने उनको खूब मालाएं पहनाई।
कमजोर निकले कलेक्टर ठाकुर
श्रीगंगानगर--यहाँ आते ही जिस प्रकार से राजीव सिंह ठाकुर ने चुस्ती फुर्ती दिखाई उस से ये आभास हुआ कि वे दूर दृष्टी पक्का इरादा और कड़े अनुशासन वाले जिला कलेक्टर साबित होंगें। मगर अब इस में संदेह होने लगा है। संदेह की वजह है उन डेरा प्रेमियों के खिलाफ मुकदमा जिन्होंने उनके घर के सामने धरना दिया था। डेरा प्रेमियों पर रास्ता रोकने और ध्वनी प्रदूषण फैलाने का आरोप है। कलेक्टर जी,आपकी नजर में वे दोषी हैं इस में कोई शक नहीं है। आप ने कोतवाल कि ओर से मुकदमा भी करवा दिया लेकिन घर ओर ऑफिस से बहार निकल कर जरा जिले का राउंड लगाओ तब आपको पता लगेगा कि किस किस ने कहाँ कहाँ रास्ता रोक कर आवागमन बाधित कर रखा है। सड़क के किनारे, नहरों की पटरी पर,कलेक्ट्रेट की दिवार के आसपास जहाँ तक निगाह जायेगी आपको कब्जे ही दिखेंगें। डेरा प्रेमियों ने तो अपना विरोध जताने के लिए कुछ घंटे के लिए ऐसा किया मगर हजारों लोग तो सरकारी जमीन पर स्थाई कब्जा किए बैठे हैं।
चलो इनकी तरफ़ नजर मत डालो, तो ये पक्का इरादा कर लेने कि आइन्दा जो भी सड़क आम पर रास्ता रोक कर धरना प्रदर्शन करेगा उसके खिलाफ ऐसा ही मुकदमा किया जाएगा वह भी प्रशासन की ओर से।क्योंकि आम आदमी में इतनी ताकत नहीं कि वह ऐसा कर सके। एक बात और आप अभी आए हो, यहाँ तो हर सप्ताह कई कई बार विभिन्न संगठन इसी प्रकार से धरना प्रदर्शन करेंगें। अगर ऐसे ही मुकदमे दर्ज होते रहे तो जाँच अधिकारी कम रह जायेंगें। शनिवार को डेरा प्रेमी आपके घर तक आ गए अगर आप तुरंत अपनी "प्रजा" से दुखदर्द पूछकर बाहर आकर उनका ज्ञापन ले लेते तो आपकी शान नहीं घटने वाली थी। तब ५ मिनट में सब के सब अपने अपने घर चले जाते, मगर आप बाहर क्यूँ आते आप तो कलेक्टर हो!
कलेक्टर साहेब आप जब तक यहाँ रहें ऐसा ही करना। मन की बात कहूँ, कलक्टरी करना अलग बात है और कलक्टरी करते हुए लोगों का दिल जीतना एक अलग बात। केवल कलक्टरी करने वालों को लोग भूल जाते हैं। इस इलाके के दिल का मिजाज बहुत ही अलग प्रकार का है। जी में आया तो आप पर सब कुछ निछावर कर देंगें और जच्च गई तो पानी भी नहीं पिलायेंगें। निर्णय आप को करना है कि कैसी कलक्टरी करनी है।
Saturday, January 17, 2009
कलेक्टर निवास सामने डेरा प्रेमियों का डेरा
श्रीगंगानगर में अवकाश के दिन किसी अधिकारी ने सोचा भी नहीं होगा कि ठण्ड में उनको एक नई परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन तो सच्चा सौदा के मुखी संत गुरमीत राम रहीम सिंह को जिले से सकुशल वापिस भेज चैन की बंसी बजा रहा था। अचानक दिन में डेरा प्रेमियों ने जिला कलेक्टर राजीव सिंह ठाकुर के निवास के सामने डेरा जमा लिया। डेरा मुखी १५ जनवरी को अपने गाँव आए थे। कल रात को उनको वापिस भेज दिया गया। डेरा के प्रवक्ता ने कहा कि उनको पाँच मिनट में ना जाने पर पर्चा दर्ज कर लेने की धमकी दी गई। जबकि पहले उनको रहने की अनुमति देने का भरोसा दिलाया गया था। जिला कलेक्टर ने इस बात से इंकार किया है। बाद में डेरा प्रेमी सी एम के नाम एक ज्ञापन देकर लौट गए। श्रीगंगानगर में १५ मई २००७ को डेरा प्रेमियों और सिख समाज के लोगों के बीच हिंसक टकराव हो गया था। उसके बाद से प्रशासन से डेरा प्रेमियों और उनके गुरु पर अंकुश लगा रखा है। सिख समाज के कुछ लोग प्रशासन को आँख दिखाकर यह सब करने को मजबूर करते रहते है। हाल ये है कि डेरा प्रेमियों को अपने घरों में भी सत्संग करने के लिए सौ बार सोचना पड़ता है। प्रशासन बेवजह चन्द सिख व्यक्तियों को सिख समाज का लीडर मान रहा है। जबकि सालों से डेरा मुखी का सत्संग श्रीगंगानगर जिले में होता आ रहा है। आज पहली बार डेरा प्रेमियों ने प्रशासन पर अपना उसी तरीके से बवाब बनाया है जैसे दूसरा पक्ष करता है।
Friday, January 16, 2009
कब भरेगा पाप का घड़ा
---- चुटकी----
पाक
जिद पर अड़ा,
भारत
नरम पड़ा,
आवाम
बेबस खड़ा,
कब भरेगा
पाप का घड़ा।
Thursday, January 15, 2009
श्री कमल नागपाल को श्रद्धांजली
टीवी पत्रकारों ने किया विरोध



Wednesday, January 14, 2009
की मास्टर सत्यम का
Raju Raju had a great fall
Balance sheet died
Shareholders cried
Raju Raju made a fraud
----
Raju Raju Yes baba
Cheating us No baba
Telling Lies No baba
Open the balance sheet
HA HA हा

यह सब कुछ मेरे दोस्त नरेंद्र शर्मा ने मुझे मेल किया। जो मैंने यहाँ पोस्ट कर दिया।
ख़ुद पर तो बस चलता नहीं

Tuesday, January 13, 2009
अपनी अपनी ढफली
पाक में सबकी
अपनी अपनी ढफली
अपना अपना राग,
कोई सुना रहा बन्नी
कोई गा रहा फाग।
Sunday, January 11, 2009
क्या मंदा है श्रीमान
मंदा मंदा मंदा
क्या मंदा है श्रीमान,
जिसके बिना
ना काम चले
वह महंगा सब सामान,
रोटी महँगी
कपड़ा महंगा
महंगा है मकान,
मंदा मंदा मंदा
क्या मंदा है श्रीमान।
Saturday, January 10, 2009
एस पी,डीएसपी आपका जवाब नहीं
श्रीगंगानगर जिला पाकिस्तान से लगा हुआ है। इसके तीन तरफ़ छावनियां हैं। श्रीगंगानगर जिला हर लिहाज से बहुत ही संवेदनशील है। ऐसे स्थान पर नियुक्त एसपी अपना फ़ोन अटेंड ही ना करे तो इस से अधिक संवेदनहीनता और क्या हो सकती है। पता नहीं कौन क्या सूचना एसपी को देना चाहता हो! हो सकता है कोई बहुत अधिक पीड़ित आदमी एसपी की मदद चाहता हो!सम्भव है कोई संभावित बड़े अपराध के बारे कोई सुचना देना चाहता हो!मगर इन सब बातों से इन अधिकारियों को क्या? ये तो सरकार के नौकर हैं,जनता के प्रति इनकी जवाबदेही थी ही कब? अगर कोई अधिकारी,बड़ा नेता इस को पढ़े तो इस पर कुछ ना कुछ करे जरुर ताकि अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी का अहसास तो हो सके।
एक ओर एस पी हैं जो अपना फोन अटेंड ही नहीं करते दूसरी ओर नए आए जिला कलेक्टर हैं जिन्होंने पहले दिन ही अपना फोन नम्बर इस वक्तव्य के साथ सार्वजनिक कर दिया कि कोई भी उनसे संपर्क कर अपनी बात कह सकता है।
Friday, January 9, 2009
सरकार बजा रही है खड़ताल
यहाँ से वहां तक
हड़ताल ही हड़ताल,
देश की सरकार
बजा रही है खड़ताल,
कौन और क्यूँ
करवा रहा है
यह सब, कोई तो
करे इसकी पड़ताल।
अब भी बाकी है चाहत जी
शिबू सोरेन से कुछ
सीख लो शेखावत जी,
क्यों करते हो
बुढापे में अदावत जी,
वाइस प्रेजिडेंट रह चुके
अफ़सोस, अब भी बाकी है
आप में कोई चाहत जी।
---
यह चुटकी भैरों सिंह शेखावत के चुनाव लड़ने के ऐलान पर है। श्री शेखावत देश के वाइस प्रेजिडेंट रह चुके,प्रेजिडेंट का चुनाव हार चुके, अब भी उनमे अगर कोई राजनीतिक पद पाने की लालसा है तो ये अफ़सोस करने लायक ही है। आख़िर किसी पद की कोई मर्यादा तो होती होगी। वे कहतें हैं भ्रस्टाचार के खिलाफ जनजागरण,गाँव गरीब का कल्याण और राजनीति का शुद्धिकरण उनका मिशन होगा। अच्छी बात है। लेकिन इस के लिए कोई पद होना क्या जरुरी है। महात्मा गाँधी के पास कोई पद नही था। इसके बावजूद वे लीडर थे। फ़िर आप तो ६० साल से राजनीति में हैं। यह सब पहले क्यों नही किया जो अब आप कह रहे हो। श्रीमान जी आप देख रहें हैं ना जनता ने शिबू सेरोन की क्या हालत की है। हर पल एक सा नहीं होता। आप ने तो सब कुछ भोग लिया अब क्या रह गया जो आपकी नजर से बच गया।
Thursday, January 8, 2009
सत्यम भी झूठा है
ओह ! गोड
आपका तो हर
काम अनूठा है,
कलयुग में
तो सत्यम
भी बड़ा झूठा है।
Wednesday, January 7, 2009
इजराईल को गुरु बनाओ
ना पाक को सबूत दो
ना किसी अमेरिका
को समझाओ,
आप तो बस
तुंरत इजराईल को
अपना गुरु बनाओ।
Tuesday, January 6, 2009
जैसे खो गया सब कुछ उनका
सूनी आँखें बता रही हैं
जैसे खो गया अपना कुछ उनका
मगर जब ढूंढा उन्होंने
तब एक निशान तक ना पाया
कुछ कहने को ओंठ खुले ही थे
उनका छोटा सा दिल भर आया
उनको गए हो गई एक मुद्दत
उनका एक ख़त भी ना आया
और कितना इंतजार करवाओगे
तुम्हारे इंतजार में
दिन रात का चैन गंवाया
चाँद सूरज आतें हैं
आकर चले जाते हैं
तुम्हारी यादों का झोका
आके जाने ना पाया।
Sunday, January 4, 2009
वाह ! ताज, आह ! ताज
गले बैठ गए आप के
मनमोहन,चिदंबरम
मुखर्जी, धमकाते
ललकारते
गले बैठ गए आप के,
कोई असर नही हुआ
अभी तक उस
बेशर्म पाक के।
Saturday, January 3, 2009
सबूत दे दे भारत थक गया
सबूत दे दे भारत थक गया
अमेरिका भी गया हार,
बातों से नहीं मानेगा ये
इसके जूते मारो चार।
ये है आदत से लाचार
प्यारे, आदत से लाचार।
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संसद में घुस गए आतंकी
मुंबई को दहलाते हैं,
नेता हमारे सारे कायर
बस खाली गाल बजाते हैं,
जनता है लाचार,प्यारे
जनता है लाचार।
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"बहादुर" सारे आतंकी
घर में आकर मारते हैं,
गाँधी हमारे पथ प्रदर्शक
हम दूर से ही ललकारतें हैं,
कैसी ये सरकार प्यारे
कैसी ये सरकार।
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कब तक होता जुल्म रहेगा
कोई तो समझाओ जी,
रोज रोज का मरना कैसा
एक बार मर जाओ जी,
जीना है बेकार प्यारे
जीना है बेकार।
Thursday, January 1, 2009
एक और कलेंडर बदल दिया
मैं कौन हूँ,क्या हूँ?
आज से एक और
नया साल शुरू हो गया,
लोग अपनों से मिलकर
खुशियों का इजहार करेंगें,
नए साल की मंगल
भावना के साथ
एक दुसरे के गले मिलेंगें,
मगर मैं अकेला
वर्तमान के बंद
कमरे में बैठा
आने वाले सुनहरे
भविष्य को भुलाकर
अपने भूतकाल के
बारे में सोच रहा हूँ,
जिसने मुझे हर पल हर क्षण
एक नए अनुभव से
परिचित करवाया था,
मगर अफ़सोस वह
आज तक मुझसे
मेरा परिचय नही करवा सका,
यही वजह है कि
मैं हर नए साल को
अपने आप से
दूर होता चला गया
आज स्थिति ये है कि
मैं ख़ुद नहीं जानता
मैं कौन हूँ, क्या हूँ।



